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वरिष्ठ निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. महेश मौर्य दोषमुक्त
11 साल तक चले मामले में आया निर्णय

BySurendra Jain

Aug 4, 2025

खबर पक्की, 4 अगस्त, रतलाम। जिला चिकित्सालय में पदस्थ वरिष्ठ निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. महेश मौर्य को न्यायिक मजिस्ट्रेट, प्रथम श्रेणी (सपना कनोडिया) व्दारा धारा 353 भादवि, धारा 67 सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम व धारा 3/4 स्त्रियों का अशिष्ट रुपण प्रतिषेध अधिनियम के मामले में दोषमुक्त किया गया है। 
    डॉ. महेश मौर्य की ओर से उनके अधिवक्ता अमित कुमार पांचाल व्दारा मामले में उनका पक्ष रखा गया था। उल्लेखनीय है कि इस मामले के फरियादी पूर्व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुष्पेन्द्र शर्मा ने थाना स्टेशन रोड़ पर शिकायत की थी कि दिनांक 23 अगस्त 2014 को दोपहर लगभग 12 बजे निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. महेश मौर्य द्वारा अहम एवं नशे की हालत में साजिश के तहत नियम विरुध्द तरीके से रतलाम जिला चिकित्सालय के सर्जिकल ऑपरेशन थियेटर में समस्त चिकित्सीय प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए जूते सहित एवं बिना कैप, मास्क के प्रवेश किया था और उस समय ऑपरेशन टेबल पर एक महिला रोगी एवं एक पुरुष रोगी ऑपरेशन के दौरान अर्द्धचेतन एवं अर्द्धनग्नअवस्था में लेटे हुए थे, जिससे महिला एवं पुरुष रोगियों और स्वयं फरियादी की भी एकाग्रता भंग हुई और दोनों रोगियों की स्थिति ऑपरेशन में कार्यावरोध के कारण मरणासन्न प्रकार की हो गई। इसके उपरांत भी डॉ. महेश मौर्य का दूषित कृत्य चलता रहा एवं उन्होंने स्वयं के मोबाईल को जेब से निकालकर अर्द्धनग्नअवस्था में लेटी हुई महिला एवं पुरुष रोगियों के साथ उसकी फोटो खींची एवं गाली गलौच करते हुए ओटी ट्रॉली पर लात मारकर बाहर चले गये। उक्त घटना की पुष्टि स्वयं डॉ. महेश मौर्य द्वारा दी गयी जानकारी के आधार पर प्रकाशित विभिन्न समाचार पत्रों के माध्यम से की गई। इसके उपरांत डॉ. महेश मौर्य ने महिला एवं पुरुष रोगी की आपत्तिजनक तस्वीरें फेसबुक पर अपलोड की और व्हाट्सअप पर स्वयं के मोबाइल द्वारा पोस्ट की गयी। जिसके कारण उसकी छवि को धूमिल किया गया।
    मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से फरियादी डॉ. पुष्पेन्द्र शर्मा, डॉ. जितेन्द्र जायसवाल, नर्स मीना पाटिल, स्टेशन रोड़ थाना के पूर्व प्रभारी राजेश सिंह चौहान के अलावा एक  महिला और एक पुरुष रोगी के बयान करवाए गए थे। डॉ. महेश मौर्य की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार पांचाल व्दारा उनका पक्ष रखते हुए यह बचाव लिया गया कि डॉ. पुष्पेन्द्र शर्मा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के प्रशासनिक पद पर रहते हुए जिला चिकित्सालय रतलाम के ऑपरेशन थियेटर का उपयोग अपने निजी मरीजों के ऑपरेशन के लिए किया करते थे इसके अतिरिक्त भी अन्य नियम विरुध्द कार्य किया करते थे, जिसकी शिकायत म.प्र. चिकित्सा अधिकारी संघ व्दारा वरिष्ठ अधिकारियों को पूर्व में ही की जा चुकी थी, जिसकी रंजिश रखते हुए डॉ. महेश मौर्य को झूठा फंसाया गया था। जो फोटोग्राफ्स प्रकरण में प्रस्तुत किए गए थे, उनकी फोरेन्सिक जांच अनुसंधान अधिकारी व्दारा नहीं करवाई गई। फरियादी डॉ. पुष्पेन्द्र शर्मा घटना दिनांक को शासकीय कर्तव्य का पालन कर रहा था, ऐसा कोई दस्तावेज प्रकरण में प्रस्तुत नहीं किया। महिला रोगी व्दारा न्यायालय में बताया गया कि उसके व्दारा पुलिस में शिकायत की गई थी और फोटोग्राफ्स पुलिस को दिए थे जबकि फरियादी डॉ. पुष्पेन्द्र शर्मा ने स्वयँ व्दारा शिकायत करना और पुलिस को फोटोग्राफ्स देना बताया गया है। महिला और पुरुष रोगी ने पुलिस को बताया कि उन्होंने घटनाक्रम देखा था जबकि न्यायालयीन कथनों में कहा कि वे दोनों बेहोश थे, जिस पर माननीय न्यायालय व्दारा यह पाया गया कि जब दोनों ही रोगी बेहोश थे तब वे घटनाक्रम कैसे देख सकते हैं इसलिए इन दोनों ही साक्षियों की साक्ष्य संदेहास्पद और विरोधाभासी प्रकट होती है। प्रकरण में मरीजों के उपचार दस्तावेज बगैर किसी वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए चालान के साथ संलग्न कर दिए गए। फरियादी की ओर से पेश किसी भी फोटोग्राफ्स पर कोई दिनांक, समय और वर्ष का उल्लेख नहीं है। माननीय न्यायालय व्दारा भी उक्त फोटोग्राफ्स मोडिफाई किया जाना पाया गया। फरियादी ने यह भी बताया कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी किसी भी समय किसी भी रोगी का ऑपरेशन कर सकता है जबकि माननीय न्यायालय व्दारा यह पाया गया कि अभियोजन व्दारा प्रकरण में ऐसा कोई दस्तावेज ही पेश नहीं किया गया है जिससे यह स्पष्ट हो कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को किसी भी समय किसी भी रोगी का ऑपरेशन किए जाने का अधिकार है। फरियादी का लोक सेवक के नाते अपने पदीय कर्तव्य का पालन किया जाना दर्शित नहीं होना पाया गया इसलिए शासकीय कर्तव्य में बाधा का मामला नहीं बनता है।
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