खबर पक्की, 23 मार्च, रतलाम। रतलाम के जड़वासाखुर्द गांव में रविवार दोपहर ग्रामीण लकड़बग्घे को तेंदुआ समझ बैठे। तेंदुए की सूचना गांव में आग की तरह फैली तो दशहत मच गई। ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर खेतों की ओर दौड़ पड़े और वन विभाग को सूचना दी गई।
दरअसल, गांव के बाहर खेतों में काम करते समय ग्रामीणों को नींबू के बगीचे से तेंदुआ जैसा जानवर दौड़ते दिखा। जैसे ही बात की जानकारी गांव में लगी तो बड़ी संख्या में ग्रामीण खेतों और पहुंचे। वन विभाग के रतलाम रेंजर राधेश्याम जोशी, रेस्क्यू प्रभारी हरीसिंह डामर व अन्य अधिकारी भी गांव पहुंचे। उन्होंने सर्चिंग शुरू की, लेकिन तेदुआ नजर नहीं आया।
नींबू के खेत में बिल बना रखा था
जब वन विभाग की टीम ने उस स्थान की जांच की, जहां जानवर देखा गया था, तो वहां एक बड़ा बिल मिला। जो कि लकड़बग्घा बनाकर रहता है। रविवार दोपहर आसपास खेतों में हार्वेस्टर मशीन से गेंहू की कटाई हो रही थी। हार्वेस्टर की आवाज से डर के संभवत लकड़बग्घा अपने बिल से बाहर निकल आया। तभी वहां काम कर रहे लोगों ने उसे देखा। जिस जगह बिल बना रखा वहां पर आसपास जानवर के फुटमार्क भी मिले, लेकिन वह तेंदुए के नहीं होकर लकड़बग्घा के थे।
तेंदुए से अलग होती है लकड़बग्घे की पहचान
रेस्क्यू प्रभारी हरीसिंह डामर ने बताया कि लकड़बग्घा तेंदुए जैसा दिखता है, जिससे ग्रामीण भ्रमित हो गए। लेकिन, लकड़बग्घे के पैरों के निशान (फुटमार्क) तेंदुए से अलग होते हैं। तेंदुए के पंजों में नाखून नहीं होते, जबकि लकड़बग्घे के पैरों के निशान में नाखून स्पष्ट नजर आते हैं।
ग्राम पंचायत जड़वासाखुर्द के सचिव दिलीप सिंह सिसौदिया ने बताया कि ग्रामीणों ने तेंदुआ होने की सूचना दी थी। वन विभाग ने टीम को सूचना दी। घटनास्थल पर पहुंचने से पहले ही यह भाग गया, वह जानवर तेंदुआ नहीं बल्कि लकड़बग्घा था।
लकड़बग्घे को तेंदुआ समझ बैठे ग्रामीण, नींबू के बगीचे में भागता दिखा जानवर, फुटमार्क से हुई पहचान
