खबर पक्की : 21 दिसंबर रतलाम, मुख्यमंत्री मोहन यादव भले ही मोदी जी का विजन मोहन जी का मिशन का ढिंढोरा पीटे और प्रचार प्रसार करें जिसमें भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का जिक्र है लेकिन रतलाम जिले के बिलपांक और मुंदड़ी टप्पे की तहसीलदार पिंकी साठे मुख्यमंत्री के इस मिशन को पलीता लगाने में पीछे नहीं है। आप गरीब हो आदिवासी हो दलित हो या देश के लिए जान लगाने वाले सैनिक हो इन्हें इससे कोई सरोकार नहीं है। इसलिए इनकी कोर्ट और कार्यालय में कार्य के लिए आने वाले अभिभाषक किसान और आमजन कहने लगे हैं पिंकी साठे अमीरों को गांठे गरीबों को डांटे। संघ से जुड़े एक कार्यकर्ता ने बताया कि कोई भी इनसे कानून और तर्क की बात करता है तो यह अपने महिला होने का फायदा व कुर्सी की धौंस बता कर जेल भेजने की धमकी देती है। ताजा मामला ग्राम कुआंझागर की 17 बीघा जमीन के नामांतरण का है इसमें 10 सर्वे नंबर है और यह जमीन नंदा भील से भारतीय सेना से रिटायर्ड और कारगिल वॉर फाइटर सैनिक कैलाश निनामा ने खरीदी है और 30 से ज्यादा वर्ष से राजस्व रिकॉर्ड खसरों में नाम नंदा भील का भूमि स्वामी के रूप में चला आ रहा है रजिस्टर्ड विक्रय पत्र और रेवेन्यू रिकॉर्ड के आधार पर सामान्य तौर पर इनका नामांतरण हो जाना चाहिए किंतु पटवारी रिपोर्ट में 56,57 में तीन सर्वे नंबर को शासकीय बताया होने से आज 2024 में पूरे 10 सर्वे नंबरों का नामांतरण रोक दिया जाता है ताज्जुब की बात यह है कि मध्य प्रदेश भू राजस्व संहिता 1959 से लागू है और इसमें यह कहीं नहीं लिखा है कि अगर 56,57 में जमीन शासकीय हो तो आप उसका नामांतरण नहीं करोगे क्योंकि तब अधिकांश जमीन सरकारी ही होती थी और सरकार द्वारा ही जनता को प्रदत्त की ग़ई तभी यह भू स्वामी बने और इसी आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में उनका नाम चला आ रहा है। लेकिन भू राजस्व संहिता के किसी भी कानून का हवाला नहीं देते हुए 56,57 के आधार पर भूमि स्वामी और अपने पूर्ववर्ती अधिकारियों को भ्रष्ट और चोर बता कर गरीबों का नामांतरण रोकने वाली यह तहसीलदार मोटा माल मिलते ही इस प्रकार के नामांतरण कर देती है। खबर पक्की के पास इस बात के पुख्ता प्रमाणिक दस्तावेज है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के आज रतलाम आगमन पर रतलाम जिले की जनता यह अपेक्षा करती है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई कर के वह रतलाम की जनता को राहत प्रदान करेंगे। मध्य प्रदेश लोकायुक्त को भी ऐसे भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारियों पर निगरानी कर कार्रवाई करना चाहिए। नामांतरण रोके जाने से नाराज पूर्व सैनिक कैलाश निनामा ने बताया कि तहसीलदार को सेल्यूट से सम्मान व्यक्त करते हुए अपने नामांतरण के लिए आग्रह किया था लेकिन एक सैनिक को अपने कानूनी हक से वंचित करने वाली तहसीलदार अन्य आमजन से कैसे पेश आती होगी सोचा जा सकता है। कलेक्टर को ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई करना चाहिए, नहीं तो वह इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे।

