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जिले में देवरण्य योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु विस्तृत सर्वेक्षण कर रिपोर्ट दें : कलेक्टर श्री बाथम

BySurendra Jain

Sep 23, 2024

खबर पक्की, 23 सितंबर, रतलाम। राज्य शासन द्वारा लागू की गई देवरण्य योजना के क्रियान्वयन हेतु एक बैठक कलेक्टर सभा कक्ष में आयोजित की गई। इस अवसर पर कलेक्टर श्री राजेश बाथम ने जिला आयुष तथा जिला उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि रतलाम जिले में देवरण्य योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु एक विस्तृत सर्वेक्षण कर रिपोर्ट देवें जिससे निर्णय लिया जा सकेगा कि जिले में उक्त योजना अंतर्गत किस प्रकार की औषधि फसल को बढ़ावा देते हुए रकबा लिया जाए।
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में आयुष को बढ़ावा देने उसे रोजगार से जोडऩे के लिए राज्य शासन द्वारा देवरण्य योजना बनाई गई है। इस योजना में आधिकाधिक लोगों को आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ मिले और जनजाति क्षेत्र में रहने वाले लोगों को रोजगार का लाभ मिले। इस उद्देश्य से उनके द्वारा औषधि पौधों की खेती कराकर उन्हें उचित मूल्य तथा बाजार देकर आर्थिक रूप से सशक्त किया जाएगा। इसलिए रतलाम जिले में उक्त योजना के क्रियान्वयन हेतु बैठक आयोजित की गई थी बताया गया कि योजना से जिले में एक जिला एक उत्पाद को जोड़ते हुए तुलसी की खेती को देवरण्य योजना के अंतर्गत लिए जाने पर विचार किया जा रहा है परंतु कलेक्टर द्वारा इस संबंध में और विस्तृत सर्वेक्षण करने के निर्देश जिला उद्यानिकी विभाग तथा जिला आयुष विभाग को दिए गए।
बताया गया कि जिले के जनजाति बाहुल्य क्षेत्र बाजना तथा सैलाना में औषधि फसलों की खेती हेतु प्रोत्साहन दिया जाकर जनजाति समुदाय की आय को बढ़ाया जाएगा जो की इस योजना का मुख्य उद्देश्य भी है। देवरण्य योजना के माध्यम से आयुष औषधि उत्पादन की एक पूरी वैल्यू चैन विकसित की जाएगी। इस कार्य में स्वयं सहायता समूह की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। इसके अलावा कृषि उत्पादक संगठन, वन, पर्यटन, कृषि, सूक्ष्म लघु मध्यम तथा जनजाति कार्य विभाग भी समन्वय के साथ मिशन मोड में कार्य करेंगे, इसमें वैलनेस टूरिज्म को भी बढ़ावा देने का कार्य किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि भारत आयुष दवाईयों का दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा निर्माता है। वर्तमान में आयुष दवाइयों के निर्माण के लिए कच्चे माल की आवश्यकता अधिक है इसकी पूर्ति के लिए औषधि पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जाना शासन का लक्ष्य है। भारतीय जनजाति वर्ग औषधि पौधों के संरक्षण एवं उत्पादन का विशिष्ट ज्ञान रखता है इसलिए उनके माध्यम से औषधि पौधों की खेती को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।

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