खबर पक्की, 8 जून, रतलाम। 0 से 5 वर्ष आयु के बच्चों का सर्वेक्षण कर उन्हें कुपोषण एनीमिया, दस्त रोग, निमोनिया जन्मजात विकृतियों और अन्य जानलेवा बीमारियों से बचाने की दिशा में स्वास्थ्य कार्यकर्ता और सी एच ओ कार्य करें। यह बात मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आनंद चंदेलकर ने 24 जून से 27 अगस्त तक आयोजित होने वाले दस्तक अभियान के उन्मुखीकरण कार्यशाला के दौरान कहीं ।
सीएमएचओ ने मैदानी कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया कि दस्तक अभियान के दौरान आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम का संयुक्त दल बनाया जाए और कार्यों की मॉनिटरिंग सी एच ओ द्वारा की जाए । कार्यशाला के दौरान जिला टीकाकरण अधिकारी डॉक्टर वर्षा कुरील ने कहा कि शिशु जन्म के तुरंत बाद स्तनपान, 6 महीने तक केवल स्तनपान, 6 महीने बाद पूरक पोषण आहार दिए जाने संबंधी व्यवहारों को अपनाने से शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उज्जैन संभाग के न्यूट्रीशनल इंटरनेशनल के संभागीय समन्वयक श्री आशीष पुरोहित ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को बच्चों में होने वाला गंभीर कुपोषण पहचानने की पद्धतियां सिखाई, उन्होंने कहा कि विटामिन ए एक अत्यंत सूक्ष्म पोषक तत्व है इसकी कुल 9 खुराक बच्चों के 9 माह से 5 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक दी जाए। विटामिन ए के माध्यम से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास, आंखों की ज्योति में लाभ, पोषण स्थितियों में सुधार जैसे कई लाभ होते हैं । दस्तक अभियान की कार्यशाला के दौरान जिला मीडिया अधिकारी आशीष चौरसिया ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को परामर्श संबंधी कौशल की पद्धतियों के बारे में उन्मुखीकरण किया ।
उल्लेखनीय है कि दस्तक अभियान के दौरान शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए कार्यकर्ताओं का दल घर घर जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग कर स्वास्थ्य एवं परामर्श सेवाएं प्रदान करेंगे। उन्मुखीकरण कार्यशाला में श्री निलेश चौहान सहित जिले के सैलाना एवं पिपलोदा के एएनएम तथा सी एच ओ आदि उपस्थित रहे।

