खबर पक्की, 18 मई, रतलाम। इंदौर में फ्लैट दिलाने के नाम पर जिला मलेरिया अधिकारी और उनके कुछ साथियों के साथ 60 लाख रुपए की धोखाधड़ी होने का प्रकरण सामने आया है।
जिला अस्पताल के तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर ननावरे के निवास पर अविनाश राव निवासी जावरा फाटक, अस्थाई निवासी अखंड नगर 60 फीट रोड इंदौर से जिला मेलरिया अधिकारी डॉ. प्रमोद प्रजापति (37) पिता रामखीलावन प्रजापति निवासी डीआरपी लाईन ऑफिसर कॉलोनी, डॉ. गौरव बोरिवाल, सुनील पांचाल, डॉ. सीपी जोशी, धर्मेंद्र चौहान, विवेक जैन, तरुण कसेरा, विनय पासवान आदि लोगों की मुलाकात हुई थी। डॉ. प्रजापति ने पुलिस को बताया कि अविनाश राव से पहली मुलाकात उसी दौरान हुई थी। आरोपी अविनाश राव ने अपना परिचय सीएमएचओ के रिश्तेदार बताकर दिया। कहा कि मैं नगरी प्रशासन का भी काम देखता हूं। आपको यदि नगरी प्रशासन के किसी भी तरह का काम हो तो मुझे बताइएगा। उसने यह भी कहा की नगरी प्रशासन के जो आवासीय फ्लैट होते हैं वह हमारे ठेकेदारों और कंस्ट्रक्शन कंपनी के होते हैं जिसमें हम कुछ फ्लैट्स अलग से बेचने के लिए मिलते हैं और हमारे माध्यम से हम सेल करते हैं। कम रेट में फ्लैट इंदौर, भोपाल व रतलाम में दिलाने का भरोसा दिलाया।
अविनाश ने अपनी बातों से फंसा दिया
डॉ. प्रजापति को आरोपी अविनाश ने बताया कि नगरी प्रशासन में कुछ डीडी या वहां जाकर फ्लैट के फॉर्म भरने पड़ते हैं। वह प्रक्रिया ऑनलाइन के माध्यम से होती है। लेकिन उसने बोला कि यह नगरी प्रशासन में तो मिलेगा लेकिन कुछ फ्लैट्स जो कंस्ट्रक्शन कंपनी के ठेकेदार के माध्यम से हमको बेचने के लिए मिलते हैं उसकी पूरी कार्रवाई हमारे माध्यम से ही होती है। अविनाश राव ने फ्लैट की डिटेल संबंधी विज्ञापन डॉ. प्रजापति के वाट्सएप पर शेयर किया था। जिसमें ईडब्ल्यूएस, एलआईजी, एमआईजी की क्षेत्रफल वार जानकारी थी। अविनाश के कहे जाने पर डॉ. प्रजापति ने फ्लैट लेने का मन बनाया। उसने फ्लैट दिलाने की बात कही। अविनाश राव को 16 अक्टूबर 2023 को उसके चेक नंबर 9131129906 पर 50000 रुपए डाले। उसने अगले दिन आवेदन भेज दिया। उसमें फोटो लगाकर आधार के साथ जानकारी भरकर हस्ताक्षर करके वाट्सएप से ही वापस भेजने को कहा। अविनाश राव के बताए अनुसार जानकारी भरकर उसे भेज दी। बाद में उसने सारी प्रोसेस डेढ़-दो महीने में पूरी होकर फ्लैट की चॉबी दिलाने की बात कही।
डॉ. प्रजापति ने कुछ दिन बाद अपने दोस्तों सुनील पांचाल, डॉ. सीपी जोशी, डॉ. गौरव बोरीवाल, विनय पासवान को फ्लैट वाली बात बताई। दोस्त सुनील पांचाल और डॉ. सीपी जोशी साथ में फ्लैट देखने और जानकारी लेने इंदौर भी गए। लेकिन अविनाश ने व्यस्त बताकर आने से मना कर दिया। बाद में डॉ. प्रजापति ने अविनाश को अपने दोस्तों के साथ इंदौर व रतलाम में फ्लैट देखने की बात बताई। तो अविनाश उनके दोस्तों से भी संपर्क करने लगा।
कम रेट में दिलाने का दिया झांसा
आरोपी अविनाश राव ने डॉ. प्रजापति के दोस्तों को भी साझे में लिया। दोस्तों ने अविनाश से पूछा कि आप यह फ्लैट कैसे दिलाते हैं। तब अविनाश ने कहा कि आवास योजना के तहत जो मकान बनाए जाते हैं जो गुजरात की कंपनी बनाती है। उसके ठेकेदार से डायरेक्ट मेरा कांटेक्ट है और जिनमें से कुछ फ्लैट की सेलिंग हम डायरेक्ट करते हैं। इसलिए हमारे पास से कम रेट में फ्लैट उपलब्ध करा देते हैं। उसके द्वारा 2 बीएचके और 3 बीएचके अफोर्डेबल फ्लैट दिलाने की बात बार-बार डॉ. प्रजापति व उनके दोस्तों को कहता रहा।
इंदौर गए तब पता चला
6 अप्रैल 2024 को डॉ. गौरव बोरीवाल और सुनील पांचाल के वाट्सएप पर अविनाश राव ने एक पत्र भेजा। जो कार्यालय आयुक्त नगर निगम इंदौर का था। जिसमें 24 अप्रैल 2024 को नगर निगम इंदौर में आवास के दस्तावेज संबंधी प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए पहचान पत्र के साथ उपस्थित होना था। पत्र को लेकर 24 अप्रैल 2024 को नगर निगम इंदौर में सुनील पांचाल गए। कार्यालय में पत्र को दिखाया। पत्र को आवक जावक से मिलान किया तो पत्र फर्जी बताया। सुनील जोशी ने इस बात की जानकारी डॉ. प्रजापति व सारे दोस्तों को फोन से दी। बाद में पता चला कि अविनाश राव ने डॉ. प्रजापति व उनके सभी दोस्तों को दिए गए कागज, दस्तावेज जो उसने मोबाइल पर भेजे थे, वह सारे दस्तावेज नकली और फर्जी पाए गए। जिनका नगरीय प्रशासन से कोई लेना-देना नहीं था। इसके बाद से अविनाश राव से लगातार संपर्क संपर्क किया। लेकिन वह आज दिनांक तक नहीं मिला।
प्रकरण दर्ज किया है
थाना स्टेशन रोड प्रभारी दिनेश भोजक ने बताया कि इंदौर में फ्लेट दिलाने के नाम पर रतलाम के डॉ. प्रमोद प्रजापति समेत कुछ अन्य के साथ धोखाधड़ी हुई है। सभी अलग-अलग कुल 60 लाख रुपए दे चुके है। इन्हें ना तो फ्लैट मिला और नहीं वापस राशि। अविनाश राव के खिलाफ धारा 420, 406 भादवि में केस दर्ज किया। आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा। पूरे मामले की विवेचना की जा रही है।
इंदौर में फ्लैट दिलाने के नाम पर 60 लाख रुपए की धोखाधड़ी, जिला मलेरिया अधिकारी और उनके दोस्त आए झांसे में
