खबर पक्की, 21 मार्च, रतलाम। सात वर्ष पहले रतलाम में किसान आंदोलन के मामले में गुरुवार शाम न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। आंदोलन में शामिल कांग्रेस के किसान नेता डीपी धाकड़, पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश भरावा, राजेश पुरोहित सहित 44 किसान नेताओं में 43 को दोषमुक्त कर दिया है। एक किसान नेता भगवतीलाल पाटीदार को तीन साल की सजा सुनाई है।
4 जून 2017 को किसान आंदोलन के दौरान रतलाम के डेलनपुर में किसान उग्र हो गए थे। भीड़ में एक पत्थर ड्यूटी पर तैनात तत्कालीन एसआई पवन यादव की आंखों पर लगा। पुलिस को भीड़ को काबू करने के लिए अश्रु गैस छोडऩी पड़ी। लाठीचार्ज तक करना पड़ा। इसके बाद यह आंदोलन ऐसा उग्र हुआ कि अगले दिन 6 जून को मंदसौर जिले में हुए गोलीकांड में 5 किसानों की मौत हो गई, जबकि 1 किसान की पुलिस पिटाई के बाद मौत हो गई। इसके बाद पूरे प्रदेश में किसान सड़क पर उतर आए थे। इधर डेलनपुर में हिंसा भड़काने के आरोप में थाना औद्योगिक क्षेत्र ने 5 जून 17 को आंदोलन की अगुवाई करने वाले मुख्य किसान नेता डीपी धाकड़, तत्कालीन जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेश भरावा, किसान नेता राजेश पुरोहित, प्रकाश धाकड़, भगवतीलाल पाटीदार, शेरु पठान, विनोद राठौड़ सहित 57 लोगों के खिलाफ हत्या का प्रयास, शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, शासकीय कार्य में बाधा, शासकीय कर्मचारी से मारपीट, बलवा आदि धाराओं में केस दर्ज किया था। आंदोलन करने वालों में डेलनपुर, धामनोद, नामली, रतलाम, मऊ, अंबोदिया, मथूरी, जामथून, करमदी के कांग्रेस से जुड़े किसान नेता थे।
कांग्रेस की सरकार में केस वापस लिए
इस पूरे मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ तीन अलग-अलग केस दर्ज हुए थे। लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की डेढ़ साल की सरकार ने किसानों पर दर्ज केस माफ कर दिए थे। 15 मई 2020 को केस वापस ले लिए गए। केवल गंभीर प्रवृत्ति के अपराध में केस कोर्ट में प्रचलित रहे।
गवाह पलट गए
इस घटनाक्रम में पुलिस फरियादी और गवाह थी। अभियोजन की ओर से 22 साक्षियों के कथन कराए। जिसमें 12 पुलिसकर्मी थे। जिनमें तत्कालीन एसआई मोतीराम चौधरी (फरियादी) वर्तमान में थाना प्रभारी, औद्योगिक थाने के एएसआई पवन यादव, आरक्षक मयंक जाटव, विरेंद्र बारोड़, शोभाराम घटनाक्रम के साक्षी थे। अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार के अनुसार 12 पुलिस वाले गवाह थे। 6 पुलिस वाले ने घटना से मना कर दिया और अभियोजन के घटना के विपरित बयान दिया है।
प्लेन से चेन्नई भेजना पड़ा था एएसआई को
उपद्रव में औद्योगिक थाने के तत्कालीन एएसआई पवन यादव की बायीं आंख पर गंभीर चोट लगी थी। सीएम ने विशेष प्लेन से इलाज के लिए चेन्नई भेजा था। लेकिन उनकी आंख की रोशनी चल गई। बाद में शासन ने उन्हें स्वैच्छिक सेवानृवत्ति दे दी और इनके बेटे को पुलिस विभाग में पदस्थ कर दिया। शासकीय अधिवक्ता पाटीदार के अनुसार यह भी यह भी अपने बयानों से पलट गए। आंदोलन में घायल तत्कालीन एएसआई केएल रजक ने भी न्यायालय में क्रास में आरोपियों का सपोट किया। 6 पुलिसकर्मियों की जांच का प्रतिवेदन एसपी कार्यालय में वर्तमान में प्रस्तुत है।
57 के खिलाफ दर्ज हुआ था केस
पूरे मामले में पुलिस ने कुल 57 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। जिसमे 44 के खिलाफ प्रथम चालान पेश किया गया। उसमे पंचम अपर सत्र न्यायाधीश शैलेष भदकारिया ने 43 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। एक किसान नेता भगवती लाल पाटीदार को धारा 333 में तीन साल की सजा व तीन हजार जुर्माना लगाया है। शेष आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने बाद में पूरक चालान पेश किया। जिसका मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।
क्या बोले किसान नेता
किसान नेता डीपी धाकड़ ने कहा कि डेलनपुर कांड में जितने किसान थे उनको फंसाया गया था। आज न्यायालय ने बरी किया है। यह किसानों की जीत है। वास्तविकता में जिस समय काल परिस्थिति में बयान लिखाए गए थे। वह परिस्थितिनुसार बयान दिए गए। उन्होंने सत्यता न्यायालय के समक्ष बताई तब हम न्यायालय से बरी हुए। आज भी हमारी मांगे जस की तस है। किसान दिल्ली में डेरा डाले हुए है।
कांग्रेस नेता राजेश भरावा ने कहा कि जब झूठे केस में फंसाया जाता है तब न्याय मिलता है और फैसले से परिवार व सभी में खुशी होती है। कई किसानों को सरकार के दबाव में आकर झूठा फंसाया गया। लेकिन किसान भाई हताश नहीं हुए। बाबा महाकाल के आशीर्वाद से न्यायालय के दरवाजे पर खड़े रहे। न्यायालय पर भरोसा था। गरीब किसानों को न्याय मिला। हमें विश्वास है कि हमारे देश में न्याय जिंदा है।
सात साल में आया किसान आंदोलन का फैसला : कांग्रेस नेता धाकड़ समेत 43 आरोपी दोषमुक्त, पाटीदार को तीन साल की सजा
