खबर पक्की : 24 जुलाई रतलाम, अगर आपने स्टार हेल्थ से मेडिक्लेम पॉलिसी ले रखी है तो सावधान हो जाइए क्योंकि बीमाकर्ता वक्त इसके एजेंट बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन जब बीमा क्लेम देने की बात आती है तो यह कंपनी येन केन प्रकारेण ग्राहकों के क्लेम को रिजेक्ट कर देती है और ना केवल रिजेक्ट करती है बल्कि ओरिजिनल कागज वापस मांगने पर टाल मटोल करती है। इसी प्रकार का एक प्रकरण नजर बाग बैंक कॉलोनी निवासी सुरेंद्र जैन के साथ हुआ। सुरेश जैन 2009 से 14 साल से मेडिक्लेम कि पॉलिसी लेकर भर रहे हैं और लगभग तीन लाख से ज्यादा प्रीमियम अभी तक दे चुके हैं और आज तक एक पैसे का क्लेम नहीं लिया है। लेकिन अभी वर्ष 2023 में उनकी बेटी के जबडे मैं कुछ प्रॉब्लम होने पर उसकी सर्जरी करवाना पड़ी जिसका वी वन हॉस्पिटल इंदौर में इलाज हुआ और जिसकी सर्जरी के पूर्व सूचना बीमा कंपनी को दी गई और एक लाख ₹60000 का क्लेम के बील बीमा कंपनी को दिया गया। लेकिन बीमा कंपनी ने 5 जुलाई को उक्त क्लेम को एन केन प्रकारेण रिजेक्ट कर दिया। क्लेम रिजेक्ट कर दिये जाने के बाद जब बीमा कंपनी से इलाज के दवाइयों के ओरिजिनल बिल और कागज वापस मांगे तो बीमा कंपनी 18 दिन से रोज चक्कर दे रही थी। कभी इंदौर से कागज आने का बताती तो कभी चेन्नई से बीमा कंपनी की टाल मटोली से मजबूर होकर सुरेंद्र जैन द्वारा आज 24 जुलाई को थाना स्टेशन रोड पर शिकायत आवेदन दिया गया। आवेदन मैं एजेंट निलेश उपाध्याय के नंबर देख कर थाना प्रभारी सचिन डावर द्वारा फोन लगाया गया और कागज वापस नहीं देने का कारण पूछा गया तो उसमें कहा कि 1,2 दिन में वापस कर देंगे। थाना प्रभारी के फोन लगाने के 25 मिनिट बाद ही निलेश उपाध्याय का फोन सुरेंद्र जैन के मोबाइल पर आता है की आपके कागज आ गए हैं ले जाइए। इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि बीमा कंपनी ना सिर्फ क्लेम देने के लिए हाथ खड़े करती है बल्कि मूल कागज लेने के बाद उन्हें वापस देने में भी बहुत हिला हवाला करती है ताकि उपभोक्ता दूसरे कानूनी विकल्प क्लेम के लिए उपयोग नहीं कर सके। अतः आम उपभोक्ता को ऐसी बेईमान बीमा कंपनियों से सावधान रहना चाहिए। साथी बीमा नियामक आयोग को यह नियम बनाना चाहिए कि उपभोक्ता जो भी कागज दे रहे हैं उस मूल कागज की फोटो प्रतिलिपि पर बीमा कंपनी द्वारा रिसिप्ट अनिवार्य रूप से देना चाहिए। क्योंकि उपभोक्ता ने क्लेम में क्या कागज दिए उसके पास बीमा कंपनी की कोई रिसिप्ट नहीं होने से वह कोई कार्रवाई नहीं कर पाता।
