खबर पक्की, 21 जुलाई, रतलाम। जो स्वयं सहायता समूह अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें सहकारी संस्था बनाकर अपने काम को आगे बढ़ाना चाहिए। समूह की सदस्य संख्या अधिकतम बीस होती है जबकि सहकारी संस्था की सदस्य संख्या की कोई सीमा नहीं है। गांव में रहकर ही हम छोटे-छोटे लघु उद्योगों को शुरु करके अपनी आजीविका चला सकते हैं तथा गांव की ही महिलाओं को रोजगार भी दे सकते हैं।
उक्त विचार जिला सहकारी संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनिरुद्ध शर्मा ने रतलाम विकासखण्ड के गांव कलोरीखुर्द में महिलाओं की बहुप्रयोजन सहकारी संस्था के संचालकों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर व्यक्त किए।
श्री शर्मा ने महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे अचार एवं चप्पल निर्माण की प्रशंसा करते हुए कहा कि हमारे क्षेत्र में लहसून बहुतायत में होती है,ऐसे में लहसून की चटनी, टमाटर साँस, देसी दाल तैयार करना तथा श्रम ठेका जैसे काम भी सहकारी संस्था के माध्यम से किए जा सकते हैं। राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई नई सहकारिता नीति के तहत प्राथमिक संस्थाओं को बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं की सदस्यता दी जाएगी जिससे छोटी छोटी सोसायटीयों को अपना माल बेचने के लिए कहीं भटकने की जरुरत नहीं होगी। बहु राज्यीय संस्थाएं इनसे माल खरीद लेगी।
कार्यक्रम को सहकारी प्रशिक्षण केन्द्र इन्दौर के पूर्व प्राचार्यद्वय के.एल. राठौर, निरंजनकुमार कसारा ने संबोधित करते हुए सहकारी संस्था के संचालन की बारीकियोंसे अवगत करवाया जिसमें लोकतांत्रिक निर्वाचन प्रक्रिया, नियमानुसार लेखांकन, अंकेक्षण, उपनियम, नियम और अधिनियम सहित बैठकों का आयोजन, सदस्यों व संचालकों के अधिकार,उनके कर्तव्य सहित जानकारी दी गई। कार्यक्रम को प्रतिभागी श्रीमती कचरी बाई, श्रीमती लीलाबाई ने भी संबोधित किया।
प्रशिक्षणार्थियों को प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था सेमलिया जाकर अध्ययन भ्रमण भी करवाया गया जहाँ प्रबंधक सुनील शर्मा ने महिला प्रतिभागियों को सोसायटी संचालन का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन जिला सहकारी संघ के जनसंपर्क अधिकारी पिंकेश भट्ट ने व्यक्त किया।

