भोपाल। पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों से आम जनता परेशान है, लेकिन सरकार को इससे होने वाली आय की चिंता ज्यादा है। मप्र ने पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से पिछले तीन साल में 42 प्रतिशत ज्यादा कमाई की है। वहीं वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2016-17 तक पड़ोसी राज्यों से तुलना करें तो मप्र इसमें भी कमाई में अव्वल रहा है। मप्र की इस दौरान कमाई 36 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की आय 26 प्रतिशत से ज्यादा नहीं रही। 2014-15 में मप्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर वैट से 6 हजार 504 करोड़ रुपए कमाए थे, यह आय 2015-16 में 7 हजार 213 करोड़, 2016-17 में 8 हजार 903 करोड़ और 2017-18 में 9 हजार 252 करोड़ रुपए हो गई। वहीं, महाराष्ट्र ने 2014-15 में 19 हजार 795 करोड़ कमाए थे, जो 2016-17 में 17 फीसदी बढ़कर 23 हजार 160 करोड़ रुपए हो गई। इसी तरह उप्र की 2014-15 में 12 हजार 579 करोड़ रुपए आय हुई थी, जो 2016-17 में 26 फीसदी बढ़कर 15 हजार 850 करोड़ रुपए हो गई। इस मामले में गुजरात सबसे पीछे है। 2014-15 में गुजरात की आय 15 हजार 879 करोड़ रुपए रही थी, जो 2016-17 में 15 हजार 958 रुपए ही रही। दो साल में गुजरात की आय सिर्फ 0.05 प्रतिशत बढ़ी।
मैनुफेक्चरिंग स्टेट न होने का बहाना
मप्र सरकार पेट्रोल-डीजल पर ज्यादा वैट वसूलने के पक्ष में रही है। खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और वित्त मंत्री जयंत मलैया कई बार कह चुके हैं कि मैनुफेक्चरिंग स्टेट नहीं होने से मप्र की आय सीमित संसानों से होती है। उसमें पेट्रोल-डीजल पर वैट प्रमुख है। करीब छह महीने पहले केंद्र सरकार के निर्देश पर मप्र ने पेट्रोल और डीजल से वैट घटाया था, जिससे दामों में कुछ कमी आई थी। हालांकि इसके बाद सरकार ने एक प्रतिशत सेस बढ़ा दिया था।
