खबर पक्की, 6 जुलाई, रतलाम। जिले के बोदिना गांव की 3 हजार की आबादी बुधवार रातभर दहशत में रही। रात 8 बजे गांव में तेंदुए का मूवमेंट रहा। 10 बजे तेंदुए एक घर में घुस गया। मां और 17 साल की बच्ची तो उसी समय घर से बाहर निकल आईं, लेकिन एक 12 साल का बच्चा घर में ही सोता रह गया। उसे निकालने के लिए गांव के दो लोग छत की चद्दर हटाकर घर में उतरे और बच्चे को सुरक्षित निकालकर लाए।
इंदौर और उज्जैन से वन विभाग की टीम पहुंची। गुरुवार सुबह 4 बजे से 5.30 बजे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला। टीम ने तेंदुए को ट्रेंक्यूलाइज कर बाहर निकाला। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह नर तेंदुआ है। बीमार भी लग रहा है। तेंदुए को पिंजरे में रखकर इंदौर ले जाया गया। वहां उसका मेडिकल चेकअप होगा। बोदिना गांव सैलाना इलाके में आता है।
बोदिना गांव में दुकान के पास से रात 8 बजे बाइक से निकल रहे खोकरा गांव के जितेंद्र जमादार ने तेंदुआ देखा। उसने कॉल कर गांव के आशीष पाटीदार को बताया। गांव वाले इक_ा हुए, तब तक तेंदुआ यहां से 700 मीटर दूर नई आबादी स्थित गोपाल हायरी के घर के बाहर जा पहुंचा। घर के बाहर शोर सुना तो गोपाल की पत्नी यशोदा और 17 साल की बच्ची कुमकुम घर के दरवाजे पर आईं। उन्हें घर के बाहर बने वॉशरूम की बरसाती के पास तेंदुआ दिखाई दिया तो घबराकर दोनों तत्काल घर से बाहर निकल गईं। इतने में तेंदुआ घर में घुस गया।
बाहर जाते ही यशोदा ने बताया कि उसका 12 साल का बेटा अमित तो घर में ही सोया है। इस पर गांव के दिनेश पाटीदार और समरथ पाटीदार ने हिम्मत जुटाई और घर की छत के चद्दर हटाकर दिनेश और समरथ अंदर उतरे। दिनेश ने तेंदुए की नजरों के सामने ही धीरे से बच्चे को उठाया। इतने में समरथ छत पर चढ़ गया। दिनेश ने छत पर खड़े समरथ को बच्चे को दे दिया। फिर वह भी पाट पकड़कर ऊपर चढ़ गया।
तेंदुए की खबर से तीन हजार की आबादी वाले इस गांव में हड़कंप मच गया। रेंजर सीमा सिंह ने बताया कि तेंदुआ घर में था। हमने घेराबंदी कर दी थी, ताकि वो किसी को नुकसान नहीं पहुंचा सके। पकडऩे के लिए उज्जैन और इंदौर राला मंडल से टीम को बुलाया गया। नगर परिषद अध्यक्ष चेतन्य शुक्ला ने रात 12 बजे पिंजरा भिजवाया। टीम के पहुंचने पर सुबह 4 बजे रेस्क्यू शुरू हुआ। डेढ़ घंटे में टीम तेंदुए को ट्रेंक्यूलाइज करने में कामयाब रही।

