खबर पक्की : 19 जून रतलाम, जिस महलवाडा गेट का सौंदर्य करण 4600000 लाख और 3000000 लाख के दो टेंडर के माध्यम से कुल 7600000 लाख में किया जा रहा है इस 76 लाख में कुछ पैसा विधायक निधि से तो कुछ नगर निगम के फंड से किया जा रहा है। इस काम को चलते हुए 6 महीने हो गए हैं और इस वजह से कॉलोनी के और आसपास के सभी लोग परेशान हैं विशेषकर रजिस्टार ऑफिस और आबकारी विभाग जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय इस परिसर में होने के कारण गेट का सौंदर्यीकरण हजारों लोगों के लिए परेशानी का बायस बना हुआ है। खैर आम जनता परेशानी तो जैसे तैसे झेल लेगी क्योंकि रतलाम के लोगों को इसकी आदत है लेकिन यक्ष प्रश्न यह है कि उक्त महल वाडा का गेट और डोषी गांव की 25 बीघा जमीन वसीयत के आधार पर महाराजा के कर्मचारी अजीत सिंह को महाराजा द्वारा दी गई थी और इसके आधार पर महल वाड़े के गेट का नामांतरण नगर निगम में हो चुका है बहुत सारी संपत्ति इसमें से अजीत सिंह ने बेची है उनका भी नामांतरण हुआ है इस प्रकार यह गेट निजी संपत्ति हुआ और निजी संपत्ति पर सरकार का 76 लाख रुपया महज सौंदर्य करण के नाम पर बर्बाद करना कहां तक उचित और वैधानिक है। क्योंकि जहां तक मुझ नाचीज को समझ है उसके आधार पर निजी संपत्ति पर सरकारी पैसा खर्च नहीं किया जा सकता। बताया जाता है कि इस संबंध में उक्त मालिक अजीत सिंह द्वारा आपत्ति ली गई थी तो उसके आधार पर उसे सुंदरीकरण कार्य लेने वाली कंपनी वह नगर निगम द्वारा यह लिखकर दिया गया है कि भविष्य में कभी भी उस गेट पर नगर निगम या शासन मालिकाना हक का क्लेम नहीं करेगी। जहां तक नगर निगम का सवाल है उनका यह कहना है कि नामांतरण होने से किसी को स्वामित्व नहीं मिल जाता वह तो सिर्फ संपत्ति कर वसूलने का रिकॉर्ड है मतलब नगर निगम अपने ही रिकॉर्ड पर विश्वसनीयता का प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रहा है। निगम अफसरों का कहना है कि सौंदर्य करण के पूर्व राजस्व विभाग से जानकारी मांगी थी और उन्होंने इस गेट को अपना गेट बताया है भले ही वह प्राइवेट हो हमने तो राजस्व के कहने से खर्चा किया है। शहर के सभी राजनीतिक दलों के और सामाजिक कार्यकर्ताओं को इस तरह टैक्सपेयर्स के पैसे की बर्बादी पर संज्ञान लेना चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए शासन पर दबाव बनाना चाहिए ताकि इस तरह गैर जरूरी निजी संपत्तियों पर पैसे की बर्बादी को रोका जा सके और अपराधिक कृत्य करने वालों पर लगाम लगे।

