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कोरोना के बाद 60,000 महीना की नौकरी गंवाने वाले मनीष शर्मा हर महीने 3 से चार लाख का तेल घी और पीनट बटर बेच रहे। उपभोक्ता उनके उत्पाद के दीवाने

BySurendra Jain

Jan 29, 2023

खबर पक्की : 29 जनवरी रतलाम, 2021 की कोरोना की जबरदस्त लहर में जहां लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई वही करोड़ों ने अपनी नौकरी भी गंवाई। B.Ed कॉलेज में प्रिंसिपल रहे मनीष शर्मा भी उनमें से एक है। सब कुछ बढ़िया चल रहा था लेकिन अचानक आई कोरोना की लहर में जहां हर कोई अपने स्वास्थ्य के प्रति आशंकित था वहीं हर किसी की आर्थिक स्थिति भी गड़बड़ा रही थी। और इसी कारण मनीष शर्मा जिस B.Ed कॉलेज में प्रिंसिपल थे वहां के कर्ताधर्ता ने लगभग समूचे स्टाफ की सैलरी आधी कर दी जिसका प्रभाव मनीष शर्मा के वेतन पर भी पड़ा जो उन्हें बहुत नागवार गुजरा और इसके विरोध में उन्होंने नौकरी छोड़ दी। नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने साफ सफाई के उपयोग में लाए जाने वाले स्टील के कूचे का उद्योग डाला वह भी अच्छा भला चल निकला लेकिन एक दिन वह कूचे की मार्केटिंग के लिए कहीं मार्केट में थे और मशीन से उनकी बेटी की उंगली कट गई तो फिर उन्होंने तत्काल उस उद्योग को बंद कर उसकी मशीन को बेच दिया। इसके बाद उन्होंने खाने के शुद्ध तेलों को बनाने का निश्चय किया और गूगल पर तमाम तरह की सर्च करने के बाद उन्होंने जर्मन टेक्नोलॉजी की कोल्ड प्रेस मशीनों का आर्डर दिया और जुलाई-अगस्त 2021 में उन्होंने तरह-तरह के खाद्य और अखाद्य तेलों का उत्पाद शुरू किया। जिसमें मूंगफली, सरसों, अलसी, तिल्ली अखरोट बादाम का तेल प्रमुख है वही नीम का तेल प्याज के बीजों का तेल और अन्य अनेक प्रकार के तेलों का उत्पादन के साथ पीनट बटर, मसाला चना, और बगैर तले हुए लाल मिर्च व काली मिर्च के सिंग दाने कसूरी मेथी और सोया स्टिक का उत्पादन भी वह कर रहे हैं। अपने गुणवत्तापूर्ण तेल और खाद्य सामग्री के उत्पादन के कारण जल्द ही उन्होंने रतलाम शहर में एक अपनी अलग पहचान बना ली है और आज उनके उपभोक्ता उनके उत्पादों की शुद्धता और स्वास्थ्यवर्धक होने के कारण उनके उत्पादों को हाथों-हाथ ले रहे हैं और माउथ पब्लिसिटी के कारण आज मात्र 1 साल में तीन से ₹4 लाख रुपया महीना उनका टर्नओवर पहुंच चुका है। उनके उत्पादों के उपभोक्ताओं में जज, वकील, इंजीनियर, नेता, व्यवसायी, उद्योगपति, समाजसेवी, और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लगभग सभी तबके के लोग हैं। खबर पक्की से चर्चा करते हुए मनीष शर्मा ने बताया कि उनको आयल मार्केटिंग का पूर्व अनुभव था लेकिन पूर्व में वह जिन कंपनियों में काम करते थे वे सभी कंपनियां तेल को कानून के दायरे में मिलावट करके बेचती थी यही कारण था कि उन्होंने उस काम को छोड़ दिया था। खाने-पीने के शौकीन होने के कारण उन्होंने कुछ समय नामली में पानी पतासे और चाट , दही बड़े का ठेला भी लगाया था। इसके बाद उन्होंने sagod रोड स्थित बाल विनय मंदिर में शिक्षक के रूप में कार्य किया और गणित पढ़ाने में महारत हासिल होने के कारण उनके घर पर डेढ़ डेढ़ सौ बच्चे ट्यूशन के लिए आते थे। बाद में B.Ed कॉलेज में प्रिंसिपल हो गए लेकिन कोरोना काल में जहां हर किसी को मदद की जरूरत थी ऐसे बुरे वक्त में जब उनके college प्रबंधन ने उनकी तनख्वाह को घटा दिया तो उन्होंने कॉलेज की नौकरी को तिलांजलि दे दी लेकिन उनकी काबिलियत को देखते हुए उनके कालेज के प्रतिस्पर्धी कालेज प्रबंधन ने उनको डेढ़ी दुगनी तनख्वाह ऑफर की लेकिन सिद्धांतों के कारण उन्होंने प्रतिस्पर्धी कॉलेज की नौकरी से इंकार कर दिया और खुद का काम करने की ठानी और उनकी हिम्मत और जुनून का ही परिणाम है कि आज उनका AimVic ब्रांड खाद्य तेलों के लिए दिन-ब-दिन पॉपुलर होता जा रहा है और उनका पीनट बटर रतलाम जिले ही नहीं आसपास के जिलों में भी सभी जिम वाले शुद्ध प्रोटीन के लिए जिम में आने वाले अपने कस्टमर को देते हैं। उन्होंने बताया कि उनके उत्पाद रतलाम मंदसौर नीमच इंदौर उज्जैन सीहोर भोपाल रायसेन मुंबई सूरत तक जा रहे हैं और तो और कुछ लोग जिनके डिपार्टमेंटल स्टोर कुवैत सऊदी अरब आदि में है वह भी उनके उत्पादों को सैंपल के तौर पर अपने स्टोर पर रखने के लिए ले गए हैं। उन्होंने बताया कि हमारा एक ही लक्ष्य है कि मनुष्य के स्वास्थ्य के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए और खाद्य पदार्थ बगैर केमिकल के बगैर प्रिजर्वेटिव के होना चाहिए और साथ ही उनका मूल्य भी वाजिब होना चाहिए कड़ी मेहनत, पक्का इरादा और ईमानदारी किसी भी व्यापार को शीर्ष पर पहुंचा सकती है और यही उनका लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि आज फरियाली के नाम पर खाद्य पदार्थों में बड़ा घोटाला हो रहा है जिन तेलों में उन खाद्य पदार्थों को बनाया जा रहा है यदि वही फरियाली नहीं है तो वह खाद्य पदार्थ फरियाली होने का दावा कैसे कर सकता है। उन्होंने कहा कि आज बाजार में फरियाली मिलने वाली अधिकांश चीजें सोयाबीन व अन्य मिलावटी तेलों से बनी हुई है ऐसे में व्रत उपवास रखने वाले धार्मिक और आस्थावान नागरिकों की आस्था को चोट पहुंचाया जा रहा है। और मेरी निगाहों में यह बिल्कुल गलत कृत्य है और ऐसा करने वालों को इससे बचना चाहिए।

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