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क्या बोर्ड पर बैठकर हाई कोर्ट व हाई कोर्ट जजों के बारे में टिप्पणी करना महंगा पड़ा जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुप्ता को?

BySurendra Jain

Dec 21, 2022

खबर पक्की : 21 दिसंबर रतलाम, रतलाम जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश गुप्ता का 17 दिसंबर को हुआ अचानक तबादला सभी अभिभाषको और न्यायिक अधिकारियों में आश्चर्य और कौतूहल का विषय बना हुआ है। बताया जाता है कि उनकी कार्यप्रणाली और कार्यशैली को लेकर कई अभिभाषक व पक्षकार नाराज थे और पूर्व में भी कई शिकायतें कर चुके थे। लेकिन 16 दिसंबर को उनकी कोर्ट में अनेक चश्मदीद लोगों की उपस्थिति में जो कुछ हुआ वही उनके यहां से जाने का कारण बना। उनकी कोर्ट में उपस्थित एक चश्मदीद के बकौल इंदौर से आए अभिभाषक नीलेश अग्रवाल और उनके साथ स्थानीय अभिभाषक ऋषि अग्रवाल उनके कोर्ट में पहुंचे तब जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश गुप्ता बोर्ड पर मौजूद थे। इंदौर से आए अभिभाषक ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुप्ता को हाई कोर्ट इंदौर से जारी समन के कागज दिए क्योंकि उनके कोर्ट के बाबू को सख्त निर्देश है कि उनकी जानकारी के बगैर कोई कागज लिया नहीं जाए इसलिए वह समन के कागज सीधे बोर्ड में उनके हाथ में ही दिया गए। बताया जाता है कि उन्हीं की कोर्ट में एक मामला चल रहा था जिसमें इंदौर हाई कोर्ट से स्टे था और उसी मामले में समन जारी हुए थे। समन पढ़ते ही गुप्ता भड़क गए और कहने लगे कि मैं जिले का प्रधान न्यायाधीश क्या साइकिल लेकर समन तामील करवाने जाऊंगा हाई कोर्ट कुछ भी मनमाने आदेश जारी कर देता है मैं इस संबंध में हाईकोर्ट को लिखूंगा इस पर उपस्थित वकील ने कहा कि जी श्रीमान बिल्कुल लिखना चाहिए आप लिखने के लिए स्वतंत्र है हमें तो जो कागज हाईकोर्ट ने आप के माध्यम से तामिल करवाने के लिए दिए थे इसलिए आपको दे दिए। उन्होंने यह भी कहा की आप इतने उत्तेजित और उद्वेलित क्यों हो रहे हैं आपका क्या व्यक्तिगत इंटरेस्ट है इस मामले में इस पर गुप्ता जी का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। और काफी बहस बाजी हुई। क्योंकि मामला न्यायालय के गरिमा और सम्मान से जुड़ा हुआ है इसलिए उतना ही लिखा जा रहा है जिससे कोर्ट की गरिमा बनी रहे। पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जैसी महत्वपूर्ण कुर्सी पर बैठने के बाद अपने से ऊपर की कोर्ट उच्च न्यायालय का और वहां पदस्थ न्यायाधीशों का सम्मान ना करना और बोर्ड पर बैठे-बैठे सबके सामने इस तरह का अनर्गल प्रलाप करना यह उनका अचानक तबादले का कारण बना है ऐसा न्यायिक हल्के में माना जा रहा है क्योंकि 16 दिसंबर को यह घटनाक्रम हुआ और घटनाक्रम की चर्चा हाईकोर्ट तक पहुंची उसके अगले दिन 17 दिसंबर को उनका तत्काल ट्रांसफर आर्डर आ गया और उन्हें मुख्य न्यायाधीश जबलपुर के यहां सहायक ऑफिस सुप्रिडेंट के पद पर पदस्थ किया गया। और जबलपुर से अनुराधा शुक्ला को यहां Ratlam जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर पदस्थ किया गया।

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