खबर पक्की :17 दिसंबर रतलाम, महेंद्र मेरा नाम, सेवा मेरा काम, हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सब को मेरा सलाम। जी हां हम सबके प्रिय हर दिल अजीज सेवा के पर्याय भाई श्री महेंद्र गादिया अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके लिए इतना ही कहूंगा कि रतलाम का बेटा अमन का सपूत चला गया, हम सब को रोता छोड़ कर महेंद्र चला गया। समाज सेवा का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो जो महेंद्र गादिया की सेवा से अछूता रहा हो। बीमारों का इलाज कराना हो या गरीबों को अनाज उपलब्ध कराना हो, या गरीब छात्रों की फीस ही क्यों ना भरना हो। या साल पलटे की गोट मैं समाज के लोगों के लिए भोजन व्यवस्था करना हो हर किसी को भाई महेंद्र गादिया की याद आती है। लेकिन अफसोस अब यह हंसता मुस्कुराता चेहरा हमको नजर नहीं आएगा। बहुत गलत बात है महेंद्र भैया भला इस तरह कोई छोड़कर जाता है जिस तरह आप गए हो अभी दिन में ही समाज सेवा के लिए आपने इतनी बड़ी रैली निकलवाई सबको साथ लेकर ज्ञापन देने गए ज्ञापन का वाचन किया मीडिया वालों को खबर रिलीज की और शाम को यूं अचानक चल देना आप जैसे सज्जनों शरीफ आदमी से इतने बड़े धोखे की उम्मीद नहीं थी हमारा क्या कसूर था यही कि हम आपको प्यार करते थे आपको चाहते थे आपकी सेवाओं का सम्मान करते थे नहीं नहीं यह तो बहुत गलत बात है अगर आपको हमसे किसी तरह की नाराजगी थी तो बताना तो था भला ऐसी भी क्या नाराजगी की यू अचानक रूठ कर चल दिए। भला ऐसे भी कोई रूठता है अपनों से। जिंदगी भर सब की सेवा करते रहे और जाते वक्त न घरवालों को न दोस्तों को न समाज वालों को किसी को भी सेवा का मौका दिया। आपकी बेरुखी ने समाज में एक व्यापक शून्यता भर दी है इसे भला अब कौन पूरा करेगा। आपके लिए बस इतना ही कहूंगा। ईश्वर आप पर रहमत बरसे, ऐसी मौत को दुनिया तरसे। जिस्म की मौत कोई मौत नहीं होती, और जिस्म मर जाने से इंसान नहीं मरा करते आप भले ही चले गए लेकिन आपकी यादें हमारे साथ रहेगी रहेगी और रहेगी।

