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धर्मांतरण करने वाले लोगों को sc-st की सूची से बाहर करने हेतु 442 सांसदों से संपर्क किया संसद कानून बनाएं: कैलाश निनामा

BySurendra Jain

Oct 29, 2022

खबर पक्की : 29 अक्टूबर रतलाम, संविधान के अनुच्छेद 341 342 में क्रमश: अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए अखिल भारतीय स्तर पर राज्य वार आरक्षण और संरक्षण के लिए भारत के राष्ट्रपति सन 1950 से सूची जारी कर रहे हैं। एक और जहां अनुसूचित जाति हेतु महामहिम राष्ट्रपति ने जब पहली बार यह सूची जारी की तब धर्मांतरण करने वाले मुसलमानों और ईसाईयों को एससी में शामिल नहीं किया गया वही अनुसूचित जनजाति के धर्मांतरण करने वाले लोगों को अनुसूचित जनजाति की सूची में बनाए रखा जो मूल रूप से भारी विसंगती है एवं संविधान के कल्याणकारी उद्देश्य के विपरीत होकर मूल संस्कृति वाली अनुसूचित जनजाति के लिए समस्या का कारण बन गई है और उनके अधिकारों से वंचित कर रही है। यहां यह भी दिलचस्प है कि धर्मांतरण के पश्चात ईसाई या मुस्लिम बना अनुसूचित जनजाति का सदस्य इंडियन क्रिश्चियन या इंडियन मुस्लिम कहलाता है जिनको पहले से कानून में अल्पसंख्यक के आधार पर संरक्षण दे रखा है तो एक तरफ तो बाल संख्या को के लाभ ले रहा है दूसरी तरफ अनुसूचित जनजाति के लाभ भी ले रहा है इस प्रकार दोहरे लाभ अर्जित कर रहा है जो कि पूर्णता गलत है। उक्त जानकारी अनुसूचित जनजाति सुरक्षा मंच के मध्य भारत प्रांत के संयोजक कैलाश निनामा द्वारा स्थानीय सर्किट हाउस पर पत्रकार वार्ता में दी गई। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सन 1968 में अनुसूचित जनजाति के कांग्रेसी सांसद डॉ कार्तिक बाबुउराव ने एक विस्तृत अध्ययन कर एक पुस्तिका विश्वास की काली रात का लेखन भी किया जिसमें इस विसंगति को दूर करने के लिए काफी सुझाव दिया जाए इस अध्ययन में उन्होंने बताया कि पाठ पर्सन धर्मप्रीत के साए अखिल भारतीय स्तर पर कुल अनुसूचित जनजाति की 62% से अधिक नौकरियां छात्रवृत्ति या अनुदान ले रहे हैं साथी प्रति व्यक्ति अनुदान आवंटन का अंतर उल्लेखनीय रूप से गैर अनुपातिक था इस प्रकार की विसंगति को दूर करने के लिए संसद के संयुक्त संसदीय समिति का गठन भी किया गया जिसमें अनुशंसा की के अनुच्छेद 342 में धर्मांतरण लोगों को बाहर करने के लिए संसद कानून द्वारा राष्ट्रपति के 1950 वाले आदेश में संशोधन करें। परंतु दुर्भाग्य से उस संसदीय समिति की सिफारिश पर कानून बनने के पूर्व ही संसद भंग हो गई फल स्वरुप वह कानून आज तक नहीं बन पाया। उसी को लेकर सन 2006 में जनजातीय सुरक्षा मंच का गठन किया गया और धर्मांतर विषय में मुसलमानों को अनुसूचित जनजाति की सूची से हटाने के एक सूत्री कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया इस प्रयासों के तहत सन 2009 में महामहिम राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल महोदय को 2800000 पोस्टकार्ड लिखे गए थे। सन 2020 में 448 जिलों में जिला कलेक्टर और संभागीय आयुक्त के माध्यम से तथा विभिन्न राज्यों के राज्यपालों मुख्यमंत्रियों से मिलकर महामहिम राष्ट्रपति महोदय को ज्ञापन द्वारा निवेदन किया गया सन 2021 में भी डॉक्टर कार्तिक उरांव के जन्मदिवस पर 29 अक्टूबर के अवसर पर इस बारे में विस्तृत चर्चा की गई थी। और आज पुणे 2022 में उन्हें के जन्मदिन पर देशभर में जिला सम्मेलनों का आयोजन कर डीलिस्टिंग कानून बनाने के लिए 442 सांसदों से संपर्क कर आग्रह किया गया है। कैलाश निनामा ने बताया कि इस संदर्भ में देशभर में डीलिस्टिंग कानून को लेकर जगह-जगह मई महीने में रेलिया भी आयोजित की गई थी जिसमें , 30,000 से लेकर 50000 लोग तक रैली में शामिल हुए। उनका के सेक्स उसे अज्ञान को लेकर जनजाति सुरक्षा मंत्र तक संघर्ष करेगा जब तक के धर्मांतरण उठाएं और मुसलमानों को इस ट्रिक की पात्रता परिभाषा से बाहर नहीं निकाला जाता और इसे तू संसद द्वारा 1970 से लंबित कानून को कानून ने अमला नहीं पहना दिया जाता। पत्रकार वार्ता में अनुसूचित जनजाति मंच के जिला संयोजक कैलाश वसुनिया सहसंयोजक कैलाश देवड़ा जिला निधि प्रमुख राजेंद्र सिंह चौहान रहने दे प्रमुख दिनेश निनामा रमेश वसुनिया रमेश मेहरा कैलाश निनामा शिव मुनिया रंग लाल झोड़ियां भी मौजूद थे।

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