खबर पक्की :18 अक्टूबर रतलाम, आज इंदौर हाई कोर्ट के विभागीय लिक्विडेटर हाई कोर्ट के निर्देश पर सज्जन मिल रतलाम पर आए और उन्होंने प्रत्येक संपत्ति की सूची बनाते हुए सारी संपत्ति और जमीन को अपने कब्जे में ले लिया। बताया जाता है कि सज्जन मिल कर्मचारी और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का एक वसूली से संबंधित केस हाई कोर्ट इंदौर में चल रहा था और सज्जन मिल की सारी जमीन 389. 25 बीघा और संपत्ति सज्जन मिल को दिया गया कर्ज के एवज में एसबीआई के पास दृष्टि बंधक थी। जिसमें 159 बीघा पर वर्तमान में तालाब है और बाकी 53 बीघा जमीन मिल के पास और मौजूद है जिस पर फैक्ट्री और कर्मचारी कॉटेज बने हुए हैं। यहां उल्लेखनीय तथ्य यह है कि पूर्व में जो जमीन बिक चुकी है वह भी एसबीआई के पास वर्तमान में अभी तक बंधक है। और एसबीआई का कर्ज चुकाने के लिए इंदौर हाई कोर्ट ने उक्त सारी संपत्ति और जमीन को बेचने के निर्देश लिक्विडेटर को दिए हैं। इंदौर हाई कोर्ट के ऑफिशल लिक्विडेटर व्योमेशशेठ और सहायक लिक्विडेटर राहुल पगारे के साथ सिक्योरिटी की टीम एसबीआई का स्टाफ और वैल्यूर जयंत वोरा एंड कंपनी की टीम थी। बनाई गई लिस्ट में 62 किराएदार पाए गए जिनको ओने पौने दामों में सांठगांठ कर सज्जन मिलकर बेशकीमती संपत्तिया किराए पर दी गई है। उक्त सारी संपत्ति का कब्जा लिक्विडेटर द्वारा लेकर अपना सिक्योरिटी स्टाफ तैनात कर दिया गया है। जब एडीएम को बुरी तरह लताड़ दिया: बताया जाता है कि हाईकोर्ट इंदौर का उक्त आदेश पिछले 18 सितंबर का है और उक्त आदेश की परिपालना में आज 18 तारीख को लिक्विडेटर का रतलाम आना तय था इसकी सूचना जिला प्रशासन को 15 तारीख को दे दी गई थी। लेकिन 18 अक्टूबर को रतलाम आने के बाद लिक्विडेटर ने जिला प्रशासन को कब्जा लेने के संबंधित कई फोन लगाएं लेकिन जिला प्रशासन ने कोई रिस्पांस नहीं दिया। अंत में लिक्विडेटर ने लगभग वार्निंग वाले अंदाज में जब यह कह दिया कि मैं हाई कोर्ट को यह सूचना दे दूंगा कि प्रदेश शासन के अधिकारियों और लोकल अधिकारियों ने कोई सपोर्ट नहीं किया तब जाकर एडीएम एम एल मौर्य मौके पर पहुंचे। लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद जब सज्जन मिल क्या ऑफिस को लिक्विडेटर द्वारा सील किया जाने लगा तो इस पर एडीएम द्वारा आपत्ति ली गई और कहा गया कि हम आपको संपत्ति का कब्जा नहीं देंगे यह तो शासन की है इस पर लिक्विडेटर के धैर्य का बांध टूट गया और उन्होंने लगभग लताड़ने वाले अंदाज में एडीएम को कहा कि आप कौन होते हो मुझे रोकने वाले मेरे पास हाईकोर्ट का आदेश है और आप मेरे सहयोग के लिए यहां है बाधा डालने के लिए मैं चाहूं तो आपको यहां से बाहर जाने का कह सकता हूं। फिर उन्होंने कब्जा पंचनामा बनाया उस पर जब एडीएम साइन नहीं करने लगे और ना नूकर की तो उन्होंने कहा कि आप इस पर लिख दीजिए कि हम कब्जा नहीं दे रहे हैं और साइन कर दीजिए नहीं तो मैं हाई कोर्ट कोर्ट को रिपोर्ट दे दूंगा कि आपने कोई सहयोग नहीं किया फिर एडीएम को मजबूरी में साइन करना पड़ा। बताया जाता है कि उक्त संपत्ति को महाराजा सज्जन सिंह द्वारा अपने नाम से टेक्सटाइल मिल खोलने के लिए 1944 अप्रैल में लीज पर दिया गया था। 1986 यह टैक्सटाइल मिल लगातार चलती रही और यहां का कपड़ा देश-विदेश में मशहूर हुआ लेकिन बाद में परिस्थितियां बिगड़ती गई और यह फैक्ट्री शासन ने अधिग्रहित कर ली। 1998, 99 मजदूरों के बकाया के लिए इसके काफी सारी जमीन नीलाम की गई थी। और अब बाकी जमीन भी स्टेट बैंक के कर्ज के लिए नीलाम की जाएगी।


