खबर पक्की : 16 अक्टूबर रतलाम, आज रविवार की सुबह नेहरू स्टेडियम, जब रोज की तरह खिलाड़ी खेलने और प्रैक्टिस के लिए पहुंचे तो ताला देखकर हतप्रभ रह गए। कुछ खिलाड़ियों ने खबर पक्की के संपादक को फोन लगाया और बताया कि स्टेडियम पर ताला लगा है और सारे खिलाड़ी बाहर बैठे हैं और बताया जा रहा है कि यह एसडीएम के आदेश पर किया गया है। इस सूचना पर खबर पक्की के संपादक ने निगमायुक्त हिमांशु भट्ट को फोन लगाया और स्टेडियम बंद होने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि मैं मकान शिफ्ट करने के लिए सामान लेने के लिए घर आया हूं और रतलाम में नहीं हूं पता करके बताता हूं। इस पर खबर पक्की के संपादक ने अनुविभागीय अधिकारी संजीव पांडे को फोन लगाया और स्टेडियम बंद करवाने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि किसी संगठन ने अवैधानिक प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है इसलिए बंद करवाया है। इस पर संपादक ने दो बत्ती थाने पर पता किया तो वहां से बताया गया कि किसी भीम आर्मी के मोहन परिहार ने प्रदर्शन की चेतावनी दी है पर वह तो अंबेडकर हाल वाले ग्राउंड के लिए है पता नहीं स्टेडियम को क्यों बंद करवाया गया है। तब तक 1,2 जागरूक खिलाड़ियों ने सोशल मीडिया पर लिखना चालू कर दिया था और एसडीएम को फोन लगाया और महापौर को फोन लगाएं एक खिलाड़ी एसडीएम संजीव पांडे ने बताया कि स्टेडियम तो निगम के अंडर में आता है उन से पता कीजिए हमें नहीं मालूम हमने नहीं बंद करवाया। निगम के सिटी इंजीनियर जायसवाल जी के पास जब फोन पहुंचे तो उन्होंने भी खबर पक्की के संपादक को फोन लगाया और पूछा कि स्टेडियम क्यों बंद है क्योंकि उन्हें मालूम था कि संपादक भी रोज वही घूमते हैं तो संपादक ने उन्हें बताया कि SDM संजीव पांडे ने स्टेडियम को बंद करवाया है। पर बहुत जगह से बहुत फोन आने पर और महापौर द्वारा पूछताछ करने पर एसडीएम संजीव पांडे ने अपना किया धरा निगम के सर फोड़ दिया और 7:30 बजे के लगभग स्टेडियम खुलवा दिया। पर खिलाड़ियों का डेढ़ घंटा बर्बाद हो गया। ताज्जुब की बात यह है कि यह सब कुछ अनुविभागीय अधिकारी द्वारा मौखिक तौर पर किया गया इसके लिए कोई लिखित आदेश जारी नहीं किए गए। और जब मामला तूल पकड़ने लगा तो सारा ठिकरा निगम के सर फोड़ दिया। जबकि निगम के अधिकारियों का कहना है कि हमने स्टेडियम को नहीं बंद करवाया हमें तो मालूम भी नहीं था आप फोन लगा रहे हो तो पता चला कि स्टेडियम बंद है। एक मामूली प्रदर्शन की चेतावनी पर और वह भी अंबेडकर ग्राउंड पर होने वाला प्रदर्शन था ना कि स्टेडियम पर इस तरह की मौखिक कार्रवाई कर सैकड़ों खिलाड़ियों को परेशान करना अनुविभागीय अधिकारी की तुगलक की कार्रवाई शैली को दर्शाता है। और उससे भी बढ़कर यह कि जब मामला तूल पकड़ता दिखाई देता है तो मामले से पल्ला झाड़ कर निगम अधिकारियों पर जिम्मेदारी को ढोल देना वास्तव में बहुत गैर जिम्मेदाराना रवैया है क्योंकि जब खुद खबर पक्की के संपादक को एसडीएम फोन पर यह बताते हैं कि किसी संगठन की चेतावनी पर स्टेडियम बंद किया गया है तो फिर उनको अपने आदेश की जिम्मेदारी लेने से क्यों घबराना चाहिए। और बाद में पलटी मार कर यह क्यों कहना चाहिए कि स्टेडियम तो निगम के अंडर में आता है और उन्होंने ही बंद करवाया है। जिले के लोकप्रिय कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए कि कैसे एक जिम्मेदार अधिकारी के गैर जिम्मेदाराना बर्ताव से सैकड़ों खिलाड़ियों को परेशान होना पड़ा। और मामले के तूल पकड़ने पर कैसे जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ कर निगम के मथथे मढ़ देना। इस तरह की कार्यशैली किसी भी दिन जिला प्रशासन को महंगी पड़ सकती है।

