खबर पक्की :14 अक्टूबर रतलाम, रतलाम विकास प्राधिकरण की आवासीय योजनाओं के लिए आरक्षित खसरा नंबरों की सूची जारी करने के बाद उससे उपजे असंतोष को शांत करने के लिए कल कलेक्ट्रेट में विधायक चैतन्य कश्यप की पहल पर शाम 6:00 बजे एक मीटिंग बुलाई गई थी। मीटिंग की खास बात यह रही कि सोशल मीडिया पर, एक दूसरे से फोन पर बातचीत में और गली चौराहों पर खड़े रहकर जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन की लानत मलामत करने वालों ने मीटिंग में एक शब्द भी नहीं बोला। इससे एक बात स्पष्ट हो गई कि जितने इस योजना से प्रभावित होने वाले लोग हैं सब कागजी शेर है और उचित प्लेटफार्म पर अपने उचित हक की लड़ाई लड़ने में अक्षम है। क्योंकि अधिकांश लोगों ने मीटिंग से आने के बाद यही कहा कि कुछ भी नहीं हुआ और ठंडे छींटे डाल कर भेज दिया। उल्लेखनीय है कि रतलाम विकास प्राधिकरण द्वारा नंबरों की सूची जारी करके रतलाम के पूरे प्रॉपर्टी मार्केट का भट्टा बिठा दिया गया है। जब रतलाम विकास प्राधिकरण में कोई चुना हुआ या मनोनीत अध्यक्ष नहीं है तो प्रश्न यह उठता है कि बाहर से आए सरकारी अधिकारियों को विकास प्राधिकरण की इन योजनाओं में इतनी दिलचस्पी क्यों। और विकास प्राधिकरण शहर के सुनियोजित विस्तार के लिए होता है और जहां आबादी का घनत्व कम होता है उन क्षेत्रों में सुनियोजित विस्तार करना इसका उद्देश्य होता है। कलेक्टोरेट महू रोड पर शिफ्ट होने के बाद ट्रांसपोर्ट नगर और जिला न्यायालय भी जब उधर ही शिफ्ट हो रहा है तो उसके आसपास के इलाकों हापुखेड़ी, सुरा खेड़ी, खारा खेड़ी जहां आबादी का घनत्व ना के बराबर है वहां शहर को विस्तारित करने के बजाए काला गोरा भेरु और कनेरी रोड जहां ऑलरेडी आबादी का घनत्व ज्यादा है और प्राइवेट जमीन है और प्राइवेट कॉलोनाइजर विकास कर ही रहे हैं तो फिर उनके काम को डिस्टर्ब करते हुए इस तरह की कवायद कहां तक उचित है एक तरफ जहां नरेंद्र मोदी मिनिमम गवर्नमेंट मैक्सिमम गवर्नेंस पर जोर दे रहे हैं वही रतलाम विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन मैक्सिमम गवर्नमेंट मिनिमम गवर्नस की तर्ज पर क्यों चल रहा है। मीटिंग में आए लोगों को यह बताया गया कि हम आपकी जमीन अधिग्रहित नहीं कर रहा है उसको संयुक्त रूप से डेवलप करके जितने जमीन है उसका आधा माल आपको देंगे जो कि सरासर झुट और गलत है क्योंकि आधा माल अगर आप दे देंगे तो फिर डेवलपमेंट के और rda के खर्चे कहां से निकलेगी हकीकत में विकसित माल का 22 से 25 प्रतिशत माल ही जमीन मालिक को मिल पाएगा जिसमें बमुश्किल उसे जमीन की कीमत मिल पाएगी और वह भी कब मिलेगा उसकी कोई निश्चित समय सीमा नहीं है और सब आरक्षित जमीन 3 साल के लिए होल्ड पर चली जाएगी जिसको जमीन मालिक ना तो बेच सकता है ना डेवलपमेंट कर सकता है। मीटिंग में लोगों को यह हवा हवाई डर भी दिखाया गया कि अगर rda की योजना नहीं आती है तो उधर रेलवे लाइन आ जाएगी और इससे आपकी सारी जमीनें बर्बाद हो जाएगी। लेकिन मीटिंग में सबसे आश्चर्यजनक और हैरतअंगेज जो बात हुई वह यह कि कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने भरी मीटिंग में यह कहा कि विधायक जी को आप लोगों की चिंता है और डेवलप कॉलोनी नीलकंठ के लिए विधायक जी ने फोन किया था तो उसको भी हम इस योजना से निकाल रहे हैं यही नहीं उन्होंने विधायक जी से इस संबंध में हा भी करवाया की इसके लिए उन्होंने फोन लगाया था और उसके बाद उस पर की जाने वाली कार्रवाई रोक दी गई। क्योंकि अमूमन जिले का हर आदमी यह मानता है कि विधायक जी किसी के लिए व्यक्तिगत फोन नहीं लगाते हैं। खैर इस मामले में विधायक जी ने फोन लगाया यह अच्छी बात है और उससे भी अच्छी बात यह है कि विधायक जी के फोन पर कलेक्टर साहब ने तत्काल अमल किया इससे एक बात स्पष्ट हो गई कि विधायक जी चाहे तो rda की प्राइवेट जमीनों पर आने वाली स्कीमों को रुकवा सकते हैं। और रतलाम के ज्यादातर लोगों का मानना है कि विधायक जी को इस मामले में पहल कर इस पूरी योजना को स्थगित करना चाहिए और जो सरकारी जमीन है या जहां आबादी का घनत्व बिल्कुल कम है उस तरफ रतलाम की आबादी को शिफ्ट करने के लिए उस और सरकारी योजनाएं लाना चाहिए। ना कि इस तरह घनत्व वाले क्षेत्र में सरकारी योजनाओं को लांच कर रियल एस्टेट मार्केट को बर्बाद किया जाना चाहिए। आशा है रतलाम के विकास पुरुष इस मामले में खुले दिल से विचार कर रियल स्टेट कारोबारियों को परेशानियों से बचा कर रतलाम को सही दिशा में विकसित करने के लिए निर्णय लेंगे।
