खबर पक्की : 11 अक्टूबर रतलाम, इंदौर के सांसद शंकर लालवानी की शिकायत पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर इंदौर क्राइम ब्रांच टीआई धर्मेंद्र सिंह भदोरिया का निलंबन अपनी कहानी खुद बयां कर रहा है कि सरकार में चल क्या रहा है। बताया जाता है कि उक्त टीआई धर्मेंद्र सिंह भदोरिया के तार सीधे गृहमंत्री से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि वह ऊपर के अधिकारियों के आदेश के भी परवाह नहीं करता था। गृह मंत्री के ऑफिस में बैठने वाले दवे, पांडे और एक मामा के नाम से मशहूर ग्वालियर के शख्स जो कि जैन है प्रदेश के पुलिस विभाग से जुड़े हर मामलों में किस को फंसाना है उलझाना है या बचाना है या किसके यहां बुलडोजर जाएगा और किसके यहां नहीं जाएगा। यह तय करते हैं और सीधे पुलिस अफसरों को निर्देश देते हैं। बताया जाता है कि रतलाम के अतुल बाफना और पप्पू सेक्सी का नाम भी ऐसे ही निर्देशों के चलते हथियारों की तस्करी और अवैध बिक्री से जुड़े मामले के अपराधियों द्वारा पुलिस के ही निर्देश पर बयान में रतलाम के इन दोनों व्यक्तियों का जिनका अवैध हथियारों की तस्करी और बिक्री से दूर-दूर का कोई संबंध नहीं है लेकिन क्राइम ब्रांच टीआई के निर्देश पर इनका नाम लिया गया और फर्जी तरीके से इनको अपराधी बनाने की कोशिश की गई। बताया जाता है कि हिंदुस्तानी सटोरिया राजगुरु जो कि आजकल दुबई में रहता है उसके गृहमंत्री के यहां बैठने वाले और उनके दोस्त मामा से बहुत दोस्ताना संबंध है। राजगुरु की कोई चार पांच साल पुरानी लेनदेन अतुल के छोटे भाई हाथी से थी जो पूर्व में क्रिकेट का काम करते थे लेकिन चार-पांच सालों से उन्होंने इससे पूरी तरह हाथ खींच लिए और होटल व्यवसाय में उतर गए लेकिन उस पुराने लेन-देन के लिए राज गुरु इनको परेशान कर रहा था जबकि इनकी फाइनेंसियल स्थिति इस तरह की नहीं थी कि उसकी मांग पूरी कर सके क्योंकि जो देना था वह चार-पांच साल पूर्व ही यह दे चुके थे। लेकिन उसके बावजूद राजगुरु तीन खोखे से भी ज्यादा अधिक इनसे लेना निकाल रहा था। इनके द्वारा उसे स्पष्ट बता दिया गया था कि भाई अब और पैसे नहीं दे सकते हमारी आर्थिक स्थिति इस तरह की नहीं है कि हम आप की मांग पूरी कर सके होटल व्यवसाय के लिए भी हमने काफी लोन लिया है लेकिन उसके बावजूद राजगुरु इन को परेशान कर रहा था। इसी कारण राजगुरु ने अपने दोस्त मामा के माध्यम से इसका नाम अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त में डलवा कर वसूली करने की सोची यही कारण है कि एक तमंचा भी नहीं खरीदने वाले का नाम अवैध हथियारों से जोड़ दिया गया जबकि चार पांच साल से अतुल बाफना पूरी तरह धार्मिक रंग में रंगे है और किसी तरह के अवैध कामों में लिप्त नहीं है उसके बावजूद उनका नाम आना प्रदेश सरकार के पुलिस विभाग की कार्यवाही को बदस्तूर बयान कर रहा है। क्या मुख्यमंत्री इस नेक्सस को तोड़ने की और गृह मंत्री के कार्यालय से इस तरह की गतिविधियों को संचालित करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की हिम्मत जुटा पाएंगे।
