खबर पक्की : 8 अक्टूबर रतलाम, 30 सितंबर की इस घटना को आज 8 दिन बाद भी जब किसी अखबार किसी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सोशल मीडिया ने इस खबर को लगाने का जोखिम नहीं उठाया और आप तक सच पहुंचाने की जहमत नहीं उठाई तब खबर पक्की द्वारा इस खबर को लगाने का औचित्य सिर्फ यह है कि हम आत्मा अवलोकन करें कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। घटना जवाहर नगर के अंबे माता मंदिर की है जहां हमेशा की तरह नवरात्रि पर गरबा का आयोजन किया गया था। आयोजन समिति द्वारा गरबा गायन के लिए एक प्रोफेशनल मुस्लिम गायक इकबाल को आमंत्रित किया गया था। जब गायक अपनी प्रस्तुति दे रहा था तब
25,30 लोगों द्वारा उक्त गायक को घेर लिया गया बताया जाता है कि यह सभी बजरंग दल से संबंधित थे और उनके द्वारा गायक कलाकार इकबाल के साथ जोर जबरदस्ती हाथापाई करने की कोशिश की गई और उसे गरबा गायन से रोक दिया गया कि मुस्लिम माताजी के मंदिर में नहीं गाएगा। उक्त घटना की सूचना पुलिस को मिली वायरलेस सेट पर सूचना मिलने पर तत्काल पुलिस वहां पहुंची और उक्त गायक कलाकार को वहां से ले गई जबकि पुलिस को अच्छी तरह से मालूम था कि आयोजकों ने ही उस कलाकार को गरबा गायन के लिए आमंत्रित किया था फिर भी 25,30 लोगों की भीड़ के सामने पुलिस ने समर्पण कर दिया। खैर पुलिस ने जो किया उस वक्त के तात्कालिक परिस्थितियों और विवाद को टालने के लिए किया। आयोजकों ने भी विवाद और झंझट से बचने के लिए ऐसे तत्वों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। ना पुलिस वह प्रशासन द्वारा भविष्य की चिंताओं के मद्देनजर अभी तक ऐसे तत्वों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई तो फिर त्योहारों के पूर्व होने वाली शांति समितियों की बैठकों का औचित्य क्या है। विदेश में जब कोई रंग भेदी घटना या किसी भी भारतीय के साथ चाहे वह किसी भी धर्म का हो कोई भी घटना घटित होती है तो वहां के अखबारों के साथ-साथ भारतीय मीडिया में भी प्रकाशित होती है। तो सोचिए इस तरह की घटनाओं का प्रकाशन जब विदेशी मीडिया में होगा तो देश की छवि को कितना नुकसान पहुंचेगा। हम तालिबान और आईएसआई द्वारा की गई घटनाओं के लिए इस्लामिक शिक्षा और कट्टरता को दोषी मानते हैं और दिन रात उनकी आलोचना करते है और यह सही भी है ऐसी घटनाओं की किसी भी सभ्य समाज में जगह नहीं है और इनका कट्टर विरोध होना ही चाहिए। लेकिन जब ऐसी ही घटनाओं को आप अपने ही देश में अंजाम देंगे तो आप किस नैतिक बल के साथ तालिबान और आईएसआई की घटनाओं का विरोध करेंगे। आप सांप्रदायिक आधार पर एक इकबाल का विरोध करके अपने देश के बुलंद इकबाल को ही कम करेंगे और इस तरह की घटनाओं से विदेश में कार्यरत भारतीयों की सुरक्षा को खतरे में डालेंगे। धर्म और भगवान के नाम पर बनाए गए इस तरह के संगठन जब किसी निर्मल और निर्दोष को इस तरह भीड़ बनाकर घेर लेते हैं तो इसमें किस तरह की बहादुरी है इससे तो समाज धर्म और भगवान की ही प्रतिष्ठा और गरिमा को ठेस पहुंचती है। एक तरफ जब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत मुस्लिमों को विश्वास में लेने के लिए मस्जिद और मदरसा जा रहे हैं वही उसके आनुषंगिक संगठन इस तरह की हरकतों को अंजाम देकर उनके प्रयासों को ठेस पहुंचा रहे हैं। जिस तरह तालिबान और आईएसआई अपने ही लोगों को नियंत्रित कर पूर्ण सत्ता हथियाना चाहते हैं और लोगों के जीवन को नियंत्रित करना चाहते हैं इस तरह की कोशिशों को अपने देश में रोका नहीं गया तो हिंदुस्तान को दूसरा पाकिस्तान या अफगानिस्तान बनने से नहीं रोका जा सकता। बताया जाता है कि सिंधी समाज और कई अन्य संगठनों द्वारा शरद पूर्णिमा पर गरबो का आयोजन करने की घोषणा की गई थी लेकिन इसी तरह के संगठनों के दबाव में प्रशासन द्वारा गरबो की अनुमति नहीं दी जा रही है फल स्वरूप गरबो का कार्यक्रम निरस्त कर दिया गया है। यहां एक और बात उल्लेखनीय है कि नगर निगम द्वारा आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में अब्दुल शकूर बैंड को आमंत्रित किया गया था। चुंकी निगम प्रशासन पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन के लोग यहां मौजूद थे इसलिए इस कार्यक्रम में हंगामा या झंझट खड़ा करने की ऐसे संगठनों की हिम्मत नहीं पड़ी लेकिन वक्त रहते ऐसे तत्वों पर काबू नहीं पाया गया तो अमन भाई चारे और सौहार्द्र के लिए पहचान रखने वाले शहर रतलाम को किसी की नजर लगते देर नहीं लगेगी।

इकबाल को ले जाती पुलिस की गाड़ी
