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तेरे बाप की है, विधायक चैतन्य कश्यप का अपमान नहीं प्रत्येक रतलामी का अपमान है भला है बुरा है जैसा भी है हमारा विधायक है

BySurendra Jain

Aug 23, 2022

खबर पक्की: 23 अगस्त रतलाम, मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव को 14 महीने बचे है। पंचायत चुनाव में जयेस को मिली सफलता से वह अति उत्साहित है। यही कारण है कि 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस में अपनी ताकत दिखाने के मात्र 13 दिन बाद 22 अगस्त को उसने निवेश क्षेत्र के विरोध को लेकर फिर रतलाम मैं शक्ति प्रदर्शन किया। इसको देखते हुए लगता है कि अब रतलाम जिला चुनाव मोड में आ चुका है और यह चुनाव तक सब ऐसा ही चलता रहेगा। अपने हक और हित के लिए लड़ना विरोध प्रदर्शन करना हर आदमी का अधिकार है और यह उसको संविधान ने दिया है। किंतु महज अपनी राजनीति चमकाने के लिए अपने समुदाय के लोगों की भावनाओं को उभारना और समुदायों में आपसी वैमनस्य को पैदा करना किसी भी तरह उचित नहीं कहा जा सकता। जब प्रशासन द्वारा व राजनीतिक नेतृत्व द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया है कि जो भी निवेश झोन बन रहा है उसमें अधिकांशत भूमि शासकीय और बंजर भूमि ली जा रही है। और दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे के नजदीक इस निवेश झोन का होना रतलाम के विकास और प्रगति को चार चांद लगा सकता है। उसके बावजूद महज राजनीतिक कारणों से इस निवेश झोन का विरोध करना किसी भी तरह उचित और दूरदर्शी पूर्ण निर्णय और तार्किक विरोध नहीं कहा जा सकता। उसके बावजूद आप को संविधान में विरोध का अधिकार दिया है तो आप विरोध कर सकते हैं उसका कोई विरोध नहीं है लेकिन विरोध की आड़ में बाहर से आए हुए लोग किसी को व्यक्तिगत निशाना बनाए और समुदाय विशेष की खिल्ली उड़ाए किसी भी दशा में सहन नहीं किया जा सकता। जो संबोधन आप अपने स्वयं के लिए पसंद नहीं करते तो वही संबोधन आप दूसरे के लिए करके आप अपने समाज प्रदेश और देश को प्रगति की ओर कदापि नहीं ले जा सकते। कल स्टेडियम में उपस्थित भीड़ संबोधित करते हुए एक जिले से बाहर से आए हुए वक्ता द्वारा जिस भाषा और लहजे में एक भारी बहुमत से चुनकर आए हुए जनप्रतिनिधि को यह कहा गया कि तेरे बाप की है तो यह हर उस मतदाता को गाली है जिसने उस जनप्रतिनिधि के चुनाव में मतदान किया है भले ही उसने उसको वोट दिया हो या नहीं दिया क्योंकि जनप्रतिनिधि उस पूरे क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व करता है जहां से वह चुना गया है। इसके बाद वही वक्ता फिर धमकी भरे अंदाज में कहता है सुन लेना रे जो आदिवासी है वह भी और जो आदिवासी नहीं है वह भी, यह विधायक नहीं व्यापारी है व्यापारी, तो भाई जैसे किसान होना गुनाह नहीं है मजदूर होना गुनाह नहीं है आदिवासी होना गुनाह नहीं है तो फिर क्या व्यापारी होना गुनाह हो गया यह कह कर आपने सिर्फ विधायक चैतन्य काश्यप को नहीं तमाम व्यापारी समुदाय को गाली दी है और इस तरह की भाषा आदिवासियों की संस्कृति और संस्कार से मेल नहीं खाती। इस तरह की भाषा और लहजे ने रतलाम शहर के प्रत्येक नागरिक को चोट पहुंचाई है। विधायक चैतन्य काश्यप मैं हजार बुराई हो सकती है आप उसकी खोजबीन करिए और उनका विरोध करिए उसका कोई विरोध नहीं है जनता को उनके किए गए कार्यों की समीक्षा और विरोध करने का पूरा अधिकार है किंतु वह जिस समुदाय से आते हैं उस समुदाय को इस प्रकार सार्वजनिक रूप से अपमानित करना किसी भी तरह जायज नहीं ठहराया जा सकता। वह भी तब जब जनता यह भलीभांति जानती है कि उनका जनप्रतिनिधि किसी बहुत बड़े पद पर नहीं है उसके बावजूद अपने व्यक्तिगत संपर्कों के बल पर रतलाम का विकास उनकी प्राथमिकता में सर्वोच्च स्थान पर है उनमें लाख बुराई या कमियां निकाल सकते हैं पर रतलाम के अच्छे के लिए उनकी भावनाओं को आप नजरअंदाज नहीं कर सकते। और यह रतलाम के प्रत्येक नागरिक ने महसूस किया है। और इसलिए सार्वजनिक मंच से एक जनप्रतिनिधि के अश्लील और अभद्र भाषा में किए गए अपमान को रतलाम की जनता के प्रत्येक नागरिक का अपमान माना जाना चाहिए और प्रत्येक नागरिक को इस भाषा का विरोध करना चाहिए क्योंकि अगर आज आपने इस तरह की चीजों को सहन किया तो आगे आपको बहुत कुछ सहन करना पड़ेगा हमारे विधायक का विरोध हम 50 तरीके से कर सकते हैं लेकिन कोई बाहर का आदमी हमारे शहर में घर में आकर हमारे विधायक को गाली दे जाए हम सहन नहीं कर सकते। हमने उन्हें चुना है तो उनसे जवाब तलब करना उन्हें बुरा भला कहना हमारा अधिकार है लेकिन कोई बाहर से आकर उन्हें बुरा कह जाए यह हम सहन नहीं कर सकते अगर आप अपने आप को बुद्धिजीवी कहते हैं और समझते हैं तो ऐसे मामले में खामोश होना और खुल कर अपने विचार प्रकट नहीं करना आपकी बुजदिली है।

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