खबर पक्की : 11 जून रतलाम, ऐ जमूरे आ जा महापौर चुनाव के रंग मंच पर खेल दिखायेगा: दिखाऊंगा जो कहूंगा वह करेगा, करेगा। तो जा तेरा टिकट पक्का जी हां कुछ ऐसे ही हालात महापौर चुनाव के दावेदारों के बने हुवे है। महापौर चुनाव के नामांकन की आखिरी तारीख नजदीक आती जा रही है जनता बड़ी उम्मीद से दोनों पार्टियों की तरफ टकटकी लगाए देख रही है की वह किसे टिकट देती है। रतलाम को चाहिए दूर दृष्टि वाला महापौर जो आने वाले 25 सालों के विकास को दृष्टिगत रख कर शहर के विकास का काम कर सके। और अपना पूरा समय शहर के विकास को समर्पित कर सके साथ ही जिनका जनता से जुड़ाव हो और आने वाली दैनंदिन की समस्याओं को तत्काल प्रभाव से हल करवा सकें। भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता भी संगठन और सत्ता पर नजर बनाए हुए हैं की पार्टी इस बार दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय को ध्यान में रखते हुए मौलिक सोच और स्व उत्पाद बुद्धि से कार्य करने वाले जमीनी कार्यकर्ता को टिकट देती है या फिर पहले से ही गले तक भरे हुए महज अपनी शान और शौकत व प्रतिष्ठा को दिखाने के लिए महापौर बनकर यस मैन की भूमिका निभाने वाले किसी धन्ना सेठ को टिकट देती है जो अपनी तिजोरी में से अभी जितना माल खर्च करेंगा उसका 10 गुना 100 गुना वसुलेगा। क्योंकि अभी तक जितने भी नाम चल रहे है उसमें से ज्यादातर नाम वह है जो अपने बाप दादा की विरासत को ढों रहे हैं और किसी ना किसी आका की छत्रछाया में है एक दो ही नाम ऐसे हैं जो सेल्फमेड है और जिनने अपना अस्तित्व अपना वजूद जीरो से शुरू करके खुद बनाया है और जो शहर के हित में सबको साथ लेकर चलने की क्षमता रखते हैं लेकिन खुश रखने की गारंटी किसी को नहीं देते हैं। अब देखना यही है कि चारों तरफ व्याप्त ठकुर सुहाती राजनीति में ऐसे लोगों को पार्टी टिकट देती है या फिर कोई यस मैन ही आएगा।

