खबर पक्की : 29 मई रतलाम, पंचायत चुनाव की तारीख की घोषणा हो चुकी है और जल्द ही नगर निगम नगर निकायों के चुनाव की तारीखें भी घोषित हो जाएगी। ग्रामीण क्षेत्र में जहां पंच सरपंच के लिए जमावट होने लगी है वही नगर निगम व निकाय क्षेत्र में क्योंकि चुनाव राजनीतिक सिम्बल पर लड़ा जाएगा तो तमाम राजनीतिक पार्टियां और पार्षद व नगर पालिका अध्यक्ष व महापौर पद के उम्मीदवार अपने-अपने आकाओं के मार्फत टिकट की जुगत में जुड़ गए हैं। रतलाम में भी महापौर पद के लिए दोनों पार्टियों में काफी मारामारी है। अन्य पिछड़ा वर्ग की सीट होने से भारतीय जनता पार्टी में पूर्व निगम अध्यक्ष अशोक पोरवाल, दिनेश पोरवाल, प्रह्लाद पटेल, राजेंद्र पाटीदार और प्रवीण सोनी दावेदारी कर रहे हैं। दावेदारों की इस श्रंखला में आज हम भाजपा के दावेदारों में प्रवीण सोनी की मजबूती और कमजोर पक्ष की चर्चा करेंगे। भाजपा के कद्दावर नेता प्रभात झा से इनकी बहुत घनिष्ठता है। और राजनेताओं के गुरु उत्तम स्वामी जी से भी इनके निकट के संबंध है। रतलाम के स्थानीय विधायक चैतन्य काश्यप से भी पिछले एक डेढ़ साल से इनकी काफी घनिष्ठता बढ़ गई है। भाजपा संगठन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भी इनकी काफी घुसपैठ है। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का और एक स्थानीय अखबार का भी आयोजन इनके मैरिज हॉल में हो चुका हैं। स्थानीय नेताओं में डॉ राजेश शर्मा भी इनके काफी करीबी है। वैसे तो प्रवीण सोनी की छवि काफी साफ-सुथरी और मिलनसार स्वभाव की हैं इनकी साफ-सुथरी छवि संघ और संगठन में पकड़ व स्थानीय विधायक का समर्थन होने के कारण यदि इनको महापौर पद का उम्मीदवार बनाया जाता है तो विपक्षी दलों को इन पर हमला करने के लिए कोई ज्यादा मसाला नहीं मिल पाएगा। पर चूंकि भाजपा नेता प्रभात झा के खुद के सितारे अभी गर्दिश में है और उनकी निकटता कहीं इनकी उम्मीदवारी पे भारी ना पड़ जाए। बहर हाल यह तो वक्त तय करेगा कि सत्ता और संगठन इन पर दाव लगाते हैं या नहीं।

