खबर पक्की : 22 मई रतलाम, शिवराज कमलनाथ फिर शिवराज तीन मुख्यमंत्री के कार्यकाल में भी अवैध कॉलोनियों को वैध करने की कारवाई कागजो से निकलकर मूर्त रूप नहीं ले पाई। बड़े बड़े सपने दिखाए गए से बड़े बड़े होर्डिंग लगाये गए थे और अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन दिए गए थे कि रतलाम अवैध को वैध करने के मामले में रोल मॉडल बनेगा। लेकिन रतलाम के साथ-साथ पूरे प्रदेश के नागरिक सरकार की थोथी घोषणाओ के कारण आज भी इस कार्रवाई के अभाव में नारकीय जीवन जीने को विवश है। संपत्ति कर बिजली अजीत तमाम तरह के टैक्स देने के बाद भी अवैध कालोनी के नाम पर बदनुमा धब्बा लगा होने से उनकी वैध संपत्ति पर भी उनको चवन्नी का लोन
अपने जीवन और परिवार को विकसित करने के लिए नहीं मिल पाता है। और सारी निकाय भी टैक्स तो तमाम वसूलते हैं पर उन कालोनी में अवैध के नाम पर चवन्नी का खर्च नहीं करते। अब जब के पंचायत नगर निकाय चुनाव की घोषणा हो चुकी है। अवेध कॉलोनियों के तमाम बाशिंदों को तमाम राजनीतिक दलों से इस सवाल का जवाब मांगना ही चाहिए अभी तक उन्होंने अपनी कागजी घोषणा को अमली जामा पहनाने के लिए क्या किया। या वे ख्वाब में ही जीकर ख्वाब में ही मर जाएंगे और अवैध को वैध हो जाने का उनका सपना सपना ही रह जाएगा इस चुनाव का यक्ष प्रश्न यही होना चाहिए।

