खबर पक्की: 20 मार्च, मंदसौर। अनुयोग अस्पताल के डॉ योगेंद्र कोठारी ने दोस्ती की एक अनोखी मिसाल पेश की फरवरी मध्य में दोस्त की बहन के सिर में गंभीर चोट लगने के बाद जिला अस्पताल में स्थिति नाजुक हो गई। पांच दिन बाद डॉ कोठारी को पता चलने पर उसे तुरंत अपने अनुयोग अस्पताल लाए। दोस्त उपचार के लिए लगने वाला रुपया खर्च करने में सक्षम नहीं था, लेकिन डॉ कोठारी ने इसकी परवाह नहीं की। अनुयोग अस्पताल में सिर की गंभीर चोट का उपचार कर बीस दिन में दोस्त की बहन को बिल्कुल ठीक करके घर भेजा। इसके दूसरे दिन ही दोस्त को हार्ट अटेक आ गया। डॉ योगेंद्र कोठारी को इसकी जानकारी मिली और तुरंत उपचार में जी जान लगा दी और उसे ठीक करके घर भेजा। चुनौती यही खत्म नहीं हुई, दोस्त को घर भेजने के बाद मां को मिर्गी का झोला आया और स्थिति गंभीर हो गई। मां को भी अनुयोग अस्पताल लाया गया और उसका उपचार डॉ योगेंंद्र कोठारी ने किया। तीनों का उपचार किसी भी निजी अस्पताल में कराया जाता तो कम से कम पांच लाख का खर्च होता, लेकिन डॉ योगेंद्र कोठारी ने दोस्ती का फर्ज निभाया और निशुल्क ही नहीं, बल्कि बेहतर उपचार किया।
मामला है मंदसौर के अमित डोसी का। अमित डोसी के पिता नहीं है। घर में मां और एक पोलियाग्रसित बहन नमिता है। करीब एक माह पहले नमिता डिप्रेशन का शिकार होकर दूसरी मंजिल से नीचे गिर गई। सिर में गंभीर चोट आने के बाद उसे जिला अस्पताल लाया गया। लेकिन यहां किसी न्यूरोसर्जन ने उसे नहीं देखा। न ही किसी न्यूरोसर्जरी के लिए नमिता को भेजा गया। इस दौरान डॉ योगेंद्र कोठारी हैदराबाद गौतममुनि जी मसा के दर्शन के लिए गए थे। जैसे ही वह मंदसौर पहुंचे। इस बात की जानकारी उन्हें मिली। अमित को उन्होंने तुरंत बहन को अपने अनुयोग अस्पताल लाने के लिए कहा। सिर में फैक्चर होकर घाव बढ़ गया था। उसे ठीक करना चुनौती था, लेकिन डॉ योगेंद्र्र कोठारी और उनकी टीम ने तत्काल इस चुनौती को स्वीकार किया। यहां डॉ मिलेश नागर न्यूरो सर्जन और डॉ प्रणय यजुर्वेदी हेड एंड नेक ओको सर्जन की टीम ने नमिता को आईसीयू में एडमिट किया। इसके बाद उसका ऑपरेशन किया गया। शुरुआती दिनों में उसकी मानसिक स्थिति भी बिगड़ चुकी थी, लेकिन अस्पताल के स्टॉफ ने उसे परिवार की तरह संभाला। एक मार्च को नमिता बिल्कुल ठीक हो गई और उसे डिस्चार्ज किया गया।
फिर दोस्त और फिर उसकी मां
डॉ योगेंद्र कोठारी की परीक्षा यहीं तक खत्म नहीं थी। बहन का उपचार निशुल्क करने और उसे पूरी तरह ठीक करने के बाद एक और चुनौती सामने आ गई। दूसरे ही दिन दोस्त अमित को हार्ट अटेक आ गया। तुरंत उसे अनुयोग अस्पताल लाया गया और आते ही एक पचास हजार रुपए का इंजेक्शन लगाना जरुरी था। जिसे डॉ कोठारी ने लगाकर उपचार शुरु किया। उपचार के बाद उसे वापिस घर भेजा, लेकिन अभी भी जो परीक्षा भगवान डॉ कोठारी की दोस्ती की ले रहा था, वह खत्म नहीं हुई थी। दूसरे या तीसरे दिन दोस्त की मां को मिर्गी का दौरा पड़ा। उसे भी अस्पताल लाया गया। दवाईयां और इंजेक्शन के साथ अस्पताल के डॉक्टरों ने उपचार में कोई कसर नहीं छोड़ी और मां को ठीक करके घर भेजा।
दोस्त की आंखे नम थी
तीनों के उपचार में लाखों रुपया खर्च हुआ। अमित इसका वहन करने में सक्षम नहीं था। लेकिन दोस्त डॉ कोठारी के होते एक भी रुपया अमित का खर्च नहीं हुआ। अमित से जब हमने बात की तो उसकी आंखे नम थी। उसने कहा इस व्यवसायिक दौर में भी बचपन के मित्र डॉ योगेंद्र कोठारी ने मित्रता निभाई। मुझे और मेरे परिवार को जीवनदान दिया। आज के युग में ऐसा मित्र मिलना मुश्किल ही नहीं, बल्कि नामुमकीन है। मैं अहसान मंद हू डॉ मिलेश नागर जीऔर डॉ प्रणय यजुर्वेदी जी का जिन्होंने मेरी बहन की इतनी बड़ी सर्जरी निशुक्ल की और उसे जीवनदान दिया।

