खबर पक्की :14 फरवरी रतलाम, केंद्र और राज्य सरकार किसानों की दुर्दशा की बात तो बहुत करती है और उनके हित के लिए काम करने के दावे भी करती है किंतु सरकारी मशीनरी जमीनी हकीकत को जाने बगैर मनमाने आदेश निकाल देती है जिससे छोटे और गरीब किसानों को कितने दिक्कत होती है उसका एक छोटा सा उदाहरण आपके सामने प्रस्तुत है। ग्राम बड़ोदिया की रहने वाली पुनि बाई पाटीदार 3 बीघा जमीन के मालिक है उनके पास मोबाइल नहीं है उनके पति समरथ पाटीदार जब पंजीयन के लिए कनेरी पंजीयन केंद्र पर पहुंचे तो उनका यह कहकर पंजीयन करने से इंकार कर दिया कि किसान के खुद के नाम का मोबाइल नंबर होगा तो ही पंजीयन किया जाएगा अब छोटे किसान के घर में जरूरी नहीं कि प्रत्येक के पास मोबाइल हो उनके पति ने कहा कि आप मेरा मोबाइल नंबर नोट कर ले लेकिन नहीं किया गया और उनको बगैर पंजीयन कराये वापस आना पड़ा। बगैर जमीनी हकीकत और व्यवहारिक दिक्कतों को जाना है बगैर इस तरह के आर्डर के कारण जिले के सैकड़ों हजारों किसान पंजीयन से निसंदेह वंचित हो रहे होगे क्योंकि जरूरी नहीं कि जिसके नाम पर खेत है उसी के नाम पर मोबाइल नंबर भी हो विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के। प्रशासन को तुरंत इस मामले में जरूरी कदम उठाने चाहिए।

