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आज सदी की सबसे महान गायक लता जी का देहांत हुआ है उनके सबसे मशहूर देशभक्ति गीत ए मेरे वतन के लोगों के लेखक कवि प्रदीप का जन्मदिन भी है

BySurendra Jain

Feb 6, 2022

खबर पक्की : 6 फरवरी रतलाम, लता जी द्वारा गाया मशहूर गीत ऐ मेरे वतन के लोगों 1962 के चीनी हमले में मारे गए सिपाहियों को समर्पित करने के लिए बनाया गया था। आज जब 6 फरवरी को लता जी का देहांत हुआ है इस अमर गीत के लेखक कवि प्रदीप जो की रतलाम के पास बड़नगर के रहने वाले थे का जन्मदिन है। कवि प्रदीप ने बताया था कि एक बार मुंबई की सड़कों से जाते वक्त यह लाइने ऐ मेरे वतन के लोगों उनके दिमाग में आई और लाइन भूल नहीं जाए इसके लिए उन्होंने माचिस की डिबिया पर वह लाइन लिख ली और बाद में घर जाकर उस पर पूरा गाना लिखा। यह गाना मशहूर तब हुआ। जब 1963 में जब गणतंत्र दिवस के मौके पर रामलीला मैदान में दिल्ली के नेहरू स्टेडियम में उस वक्त के प्रधानमंत्री पं॰ जवाहरलाल नेहरू के सामने यह गाना गाया था। और तब से लेकर आज तक यह गीत सबके दिलों पर राज कर रहा है।
ऐसा कहा जाता है कि जब लता मंगेशकर ने पं॰ जवाहरलाल नेहरू के आगे यह गाना गाया था। तब यह गाना सुनकर नेहरू जी की आंखों में आंसू आ गए थे। अब आप खुद ही अंदाजा लगा लीजिए कि इस गाने में देश प्रेम का कितना गहरा भाव है। जिसे लता जी ने बखूबी अंजाम दिया है।

इस गाने के लेखत कवि प्रदीप जी ने के जरिए। हमारे सीमा पर खड़े जवानों की जिंदगी और उनके देश के प्रति जज्बे को बड़ी ही आसानी और खूबसूरती से बयां किया है। जितने सरल इसके शब्द हैं। इसके भाव उतने ही गंभीर है।

हमें नहीं लगता कि कभी भी इससे बेहतर कोई भी देशभक्ति गीत बन सकता है। ये गाना आज भी लोगों के दिलों को छूने सक्षम है और इस गाने को लता मंगेशकर के साथ-साथ अन्य गायिकाओं ने भी गाया है जैसे कि अनुराधा पौडवाल। इस गाने को, गाने और सुनने का सिलसिला कभी नहीं थमेगा।

ऐ मेरे वतन के लोगों
तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सब का
लहरा लो तिरंगा प्यारा
पर मत भूलो सीमा पर
वीरों ने है प्राण गँवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो
जो लौट के घर ना आये

ऐ मेरे वतन के लोगों
ज़रा आँख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी
ज़रा याद करो क़ुरबानी

तुम भूल ना जाओ उनको
इसलिए सुनो ये कहानी
जो शहीद हुए हैं उनकी
ज़रा याद करो कुर्बानी

जब घायल हुआ हिमालय
खतरे में पड़ी आज़ादी
जब तक थी साँस लड़े वो
फिर अपनी लाश बिछा दी

संगीन पे धर कर माथा
सो गये अमर बलिदानी
जो शहीद हुए हैं उनकी
ज़रा याद करो कुर्बानी

जब देश में थी दीवाली
वो खेल रहे थे होली
जब हम बैठे थे घरों में
वो झेल रहे थे गोली

थे धन्य जवान वो आपने
थी धन्य वो उनकी जवानी
जो शहीद हुए हैं उनकी
ज़रा याद करो कुर्बानी

कोई सिख कोई जाट मराठा
कोई गुरखा कोई मदरासी
सरहद पर मरनेवाला
हर वीर था भारतवासी

जो खून गिरा पर्वत पर
वो खून था हिंदुस्तानी
जो शहीद हुए हैं उनकी
ज़रा याद करो कुर्बानी

थी खून से लथ-पथ काया
फिर भी बन्दूक उठाके
दस-दस को एक ने मारा
फिर गिर गये होश गँवा के
जब अन्त-समय आया तो
कह गये के अब मरते हैं
खुश रहना देश के प्यारों
अब हम तो सफ़र करते हैं

क्या लोग थे वो दीवाने
क्या लोग थे वो अभिमानी
जो शहीद हुए हैं उनकी
ज़रा याद करो कुर्बानी

तुम भूल ना जाओ उनको
इस लिये कही ये कहानी
जो शहीद हुए हैं उनकी
ज़रा याद करो कुर्बानी

जय हिन्द… जय हिन्द की सेना
जय हिन्द, जय हिन्द, जय हिन्द, जय हिन्द

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