खबर पक्की: 23 जनवरी रतलाम, कहा जाता है कि अपराधी कितना भी शातिर हो पर अपने पीछे सबूत छोड़कर जाता है, यह मसल आइस फैक्ट्री के मामले में पूरी तरह फिट बैठती है और इसके मालिक जादूगर जोगिंदर नाथ पुरी के ऊपर शब्दश: लागू होती है।
कुछ सालों पूर्व स्वयं जादू जादूगर जोगेंदर ने अपनी भूमि को बेचने के प्रयास में और भूमी स्वामी स्वत्व को सही साबित करने के चक्कर में शहर के कुछ लोगों को अपनी जमीन के विभिन्न न्यायालयों के आदेश तथा पत्राचार के दस्तावेज की एक मोटी किताब नुमा स्पाइरल बाइंडिंग वितरित की थी।
समय का फेर देखिए कि उसी स्पाइरल बाइंडिंग किताब के दस्तावेजों को टटोलने से तरह तरह की सच्ची कहानियां और हकीकत बाहर आने लगी है,जिसमें से एक आज हम अपने पाठकों को विचार करने के लिए प्रेषित कर रहे हैं। वह पत्र जिसमें स्वयं जादूगर जोगेंद्र नाथ पूरी अपने आप को लीज धारी बताता है ,और आइस फैक्टरी की इस भूमि को महाराजा सज्जन सिंह जी के द्वारा मात्र ₹180 प्रति वर्ष की लीज पर दिनांक 25. 12. 1946 को संपादित इस लीज डीड के आधार पर स्वयं को लीज धारी मानता है। और नगर सुधार न्यास द्वारा की जा रही अधिग्रहण की कार्रवाई में अपने आप को पत्र के माध्यम से लीज धारी बताता है एवं इस प्रकार कोई व्यक्ति यदि ठान ले तो शासकीय अधिकारियों को भ्रम जाल में फंसा कर उनको भ्रष्ट कर, उनके आने-जाने(ट्रांसफर-पोस्टिंग) का लाभ उठाकर, समय के मान से केस को ठंडा कर और ठंडे बस्ते में डालकर, वक्त आने पर उसे खोलकर अनुकूल स्थिति आने तक का समय गुजार कर, अपने पक्ष में आदेश कराते-कराते शासकीय 120 करोड़ की भूमि का निजी भूमि स्वामी बनने का खेल करने का यह एक जोरदार उदाहरण है और इसी कारण शहर में इन दिनों चर्चा में है।
सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसी यदि जांच करें तो निश्चित ही जालसाजी, कूट रचित दस्तावेजों और झूठी मनगढ़ंत कहानियों का प्रकरण परत दर परत खुलने की संभावनाएं बढ़ती जा रही है।
खबर पक्की डॉट कॉम इस समूचे प्रकरण की तह में जाकर नित- नई जानकारियां खंगाल रहा है ।और आने वाले समय में हम साबित करने की कोशिश करेंगे की उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को किस प्रकार से कूट रचित दस्तावेजों के प्रकाश में और शासकीय अधिकारियों की मिलीभगत से पारित कराया गया है।
इस प्रकार से जांच होने पर सारी जालसाजी पकड़ में आएगी और शासन की जमीन पुनः शासन को मिल सकती है।

