खबर पक्की: 24 नवंबर रतलाम, मध्य प्रदेश सरकार वादे और घोषणा तो खूब करती है लेकिन अपने बनाए कानूनों का जमीन पर पालन हो रहा है या नहीं इसे देखने की जहमत नहीं उठाती। मध्य प्रदेश सरकार ने 2018 में कानून बनाया था कि घर बैठे नामांतरण होगा इसके लिए registrar ऑफिस और तहसील के सॉफ्टवेयर आपस में जोड़े गए रजिस्टार ऑफिस से रजिस्ट्री होने के बाद जमीन संबंधित नामांतरण के लिए तहसील ऑफिस में सॉफ्टवेयर के माध्यम से रिफर किया जाता है लेकिन बहुत ही ताज्जुब और आश्चर्य की बात है कि 3 सालों में एक भी नामांतरण इसके आधार पर पूरे मध्यप्रदेश में कहीं पर भी नहीं हुआ और लोग आज भी तहसील में नामांतरण के लिए चक्कर लगाते हैं। इंदौर रतलाम आदि जगह के रजिस्ट्रार से बात हुई तो उन्होंने बताया कि हम तो रजिस्ट्री होने के बाद तहसील के software में नामांतरण के लिए उक्त रजिस्ट्री को रेफर कर देते हैं इसके आधार पर उनको नामांतरण करना चाहिए और अगर वहां से नामांतरण नहीं हो रहा है तो इसमें हमारी कोई जवाबदारी नहीं मतलब स्पष्ट है कि सरकार ने भी कानून बना कर खाना पूरी कर ली लेकिन उसके अमल में लाने के लिए अधिकारियों के ऊपर कोई बाइंडिंग नहीं की ताकि भ्रष्टाचार का खेल बदस्तूर चलता रहे। आज इस खबर को देखने के बाद पुनः दो हजार अट्ठारह का कानून याद आया और इस संबंध में विस्तार से पंजीयन अधिकारियों से बात करने के बाद सरकार को अपने बनाएं कानून की याद दिलाने और उसका पालन करने के लिए यह खबर लगाई जा रही है ताकि बेलगाम भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जा सके।

