शासन प्रशासन का जनजाति गौरव गाथा में आए लाखों आदिवासियों को वैक्सीन लगा सकते थे क्योंकि आप शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन लगाने की मुहिम चला रहे हैं इसलिए यह बात ध्यान में आ रही है। आप शहरों में वैक्सीन लगाने के लिए सख्ती बरत रहे हैं यहां तक यदि कोई मॉल जाएं टॉकीज जाएं या कहीं भी जाएं तो बिना टीका लगवाये उसे प्रवेश नहीं। इंदौर में तो टॉकीज मैं घुसने से पहले जिन को टीका नहीं लगा उनको वही वैक्सीन लगवाई। परंतु एक बात समझ में नहीं आई भोपाल में बहुत बड़ा सम्मेलन प्रधानमंत्री जी की अगुवाई में हुआ जिसकी बड़े स्केल पर तैयारी की गई आदिवासियों को लाना ले जाना, खिलाना, ठहराना। जनजाति के लिए लाखों लोग जो की ठेठ गांव से आए उन्हें भी वही वैक्सीनेशन सेंटर खोलकर वैक्सिंग लगवा देते। अब आप को टीके लगाने के लिए फिर वापस गांव गांव जाना पड़ेगा। हमारे माननीय पत्रकार, जागरूक नागरिक, राजनायक और कई जागरूक अधिकारी भी समझ नहीं पा रहे होंगे कि जहां एक तरफ शत प्रतिशत जनता को वैक्सीन लगाने की बड़ी मुहिम चल रही है वहा इतनी बड़ी तादाद में आए दूरदराज के आदिवासियों को वैक्सीन क्यों नहीं लगाई गई यह शासन प्रशासन गलती कहें या उनके पास वैक्सीन और वैक्सीन लगाने के साधन उपलब्ध नहीं थे। इस बड़ी गलती की सूचना प्रधानमंत्री कार्यालय तक भी जाना चाहिए।
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)

