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नगर सुधार न्यास के कॉलोनी अर्जुन नगर से अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई की मांग

BySurendra Jain

Oct 17, 2021

रतलाम। शहर के अर्जुन नगर में नगर सुधार न्यास की योजना क्रमांक 67 में तत्कालीन कलेक्टर और अनुविभागीय अधिकारी व्दारा नियम विरुध्द रुप से आवंटित अस्थायी पट्टों को निरस्त कर इन पट्टों को आड़ में किए गए व्यापक स्तर पर निर्मित कालोनी का अतिक्रमण हटाए जाने की शिकायत मुख्यमंत्री सहित जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक को की गई है।
शिकायतकर्ता अमित कुमार पांचाल एडवोकेट व्दारा की गई शिकायत में बताया गया है कि बीस सूत्रीय योजना के तहत नगर सुधार न्यास, रतलाम (वर्तमान में नगर पालिक निगम रतलाम) व्दारा रतलाम शहर के वर्तमान वार्ड क्रमांक 27 दिलीप नगर रतलाम के पास अर्जुन नगर नामक कालोनी का निर्माण किए जाने का निर्णय लिया गया था। नगर सुधार न्यास व्दारा प्रस्तावित अर्जुन नगर कालोनी में कुल 4071 आवासीय भूखण्डों का विकास किया जाना था, जिसमें से 2633 भूखण्ड ईडब्ल्यूएस, 974 भूखण्ड निम्न आय वर्ग तथा 449 भूखण्ड मध्यम आय वर्ग, 15 भूखण्ड उच्च आय वर्ग के लिए प्रस्तावित किए गए थे। इस योजना में स्कूल, चिकित्सालय, पुलिस स्टेशन, मार्केट, बगीचे तथा सामूहिक खुले क्षेत्रों का प्रावधान भी किया गया था। इस योजना का ले आउट प्लान सहायक संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश विभाग रतलाम व्दारा 04.09.1987 को स्वीकृत किया गया था। जिला बीस सूत्रीय समिति तथा नगर सुधार न्यास का संयुक्त सम्मेलन तत्कालीन आवास एवं पर्यावरण मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित किया गया था, जिसमें निर्णय लिया गया था कि नगर सुधार न्यास रतलाम व्दारा नगर के पश्चिम क्षेत्र इन्दिरा नगर में 2000 भूखण्ड तथा अर्जुन नगर में 1000 भूखण्ड तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के जन्म दिन पर लाटरी पध्दति से आवंटित किए जावेंगे। अर्जुन नगर में 1000 भूखण्डों के विकास कार्यों के लिए 500 ईडब्ल्यूएस भूखण्डों के लिए 33 रुपये वर्गमीटर, 300 एलआईजी भूखण्डों के लिए 55 रुपये प्रति वर्गमीटर और 75 एमआईजी भूखण्डों के लिए विकास राशि लिए जाने का निर्णय लिया गया। इस पत्र के अनुसार जैसे-जैसे भूखण्डों के आवंटन से प्राप्त राशि प्राप्त होगी वैसे ही विकास कार्य किया जावेगा। इस पत्र पर तत्कालीन नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष, मुख्य कार्यपालन अधिकारी शहरी विकास अधीक्षण यंत्री के हस्ताक्षर हैं। मध्यप्रदेश शासन के आवास एवं पर्यावरण विभाग के उपसचिव डी.एस.तिवारी व्दारा मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा उनके आदेशानुसार दिनांक 16.06.1988 को जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य शासन व्दारा नगर सुधार अधिनियम की धारा 52 की उपधारा (1) के चरण (क) के उपबंधों के तहत यह उद्घोषणा की गई थी कि नगर सुधार न्यास रतलाम व्दारा योजना क्रमांक 67 अर्जुन नगर में आवासीय भूखण्ड हेतु जिसकी अनुमानित लागत 191.63 लाख रुपये है तथा जिसका क्षेत्रफल 49.25 हेक्टेयर है एवं यह भूमि नगर सुधार न्यास रतलाम के आधिपत्य में है, जिसे मध्यप्रदेश राजपत्र में क्रमशः 27.07.1984 और 03.08.1984 तथा 18.08.1984 को प्रकाशित कराया गया है, की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। इस अधिसूचना की प्रति कलेक्टर रतलाम को भी भेजी गई थी। नगर सुधार न्यास, रतलाम व्दारा विकसित की जाने वाली योजना क्रमांक 67 अर्जुन नगर कालोनी को नगर तथा ग्राम निवेश कार्यालय रतलाम के सहायक संचालक व्दारा अपनी अभिस्वीकृति प्रदान की गई और इसका नक्शा भी स्वीकृत किया गया है। नगर सुधार न्यास के तत्कालीन कार्यपालन अधिकारी व्दारा दिनांक 19.05.1989 को सहायक संचालक नगर तथा ग्राम निवेश, रतलाम को पत्र जारी कर बताया गया कि योजना क्रमांक 67 अर्जुन नगर में 40 ईडब्लूएस भवनों का एवं 14 एलआईजी भवनों का निर्माण कार्य करवाया जा रहा है, जो पूर्ण होने को है तथा 60 ईडब्ल्यूएस भवनों एवं 40 एलआईजी भवनों की निविदाएँ आमंत्रित की गई है इसलिए उक्त योजना का संशोधित अभिन्यास स्वीकृत किया जावे जबकि ऐसा कोई निर्माण कार्य मौके पर नहीं किया गया था। आयुक्त नगर पालिक निगम, इनके इंजीनियर्स, विकास शाखा प्रभारी व विकास शाखा प्रभारी के अन्य सम्बन्धित अधिकारियों-कर्मचारियों, वार्ड पार्षद, तथाकथित राजनैतिक व्यक्तियों, म.प्र.प.क्षे.वि.वि.क. के जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों ने कई अतिक्रमणकारियों से षडयंत्र कर उन्हें योजना क्रमांक 67 अर्जुन नगर के उन भूखण्डों पर काबिज कराया गया है जो शिकायतकर्ता सहित उक्त योजना का लाभ लेने वाले अन्य भूखण्डधारियों से बड़ी धनराशि लेकर उन्हें आवंटित किए जा चुके हैं।इनके व्दारा अतिक्रमणकारियों को सड़क-पानी-बिजली,धार्मिक स्थल जैसी वे सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं जो शहर की अन्य कालोनी के निवासियों को भी उपलब्ध नहीं होती हैं। शिकायतकर्ता और अन्य कई सैंकड़ों शहरवासियों से बड़ी धनराशि कालोनी का विकास किए जाने के नाम पर लेकर कालोनी में किसी भी प्रकार का विकास कार्य नहीं किया गया है, न ही वहां अस्पताल बनाए गए और न ही योजना के स्वीकृत मानचित्र अनुसार कोई निर्माण कार्य किया गया है। योजना क्रमांक 67 अर्जुन नगर रतलाम के भूखण्डों में से कई भूखण्डों पर ऐसे व्यक्ति भी काबिज हैं जिन्हें तत्कालीन एसडीएम (शहर) व्दारा अस्थायी पट्टे भी जारी किए गए हैं, इन पट्टों का अवलोकन किए जाने के बाद शिकायतकर्ता व्दारा उक्त जारी किए गए पट्टों से सम्बन्धित दस्तावेजों को प्राप्त किया गया, जिनके अवलोकन से शिकायतकर्ता को यह जानकारी हुई कि म.प्र.शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग भोपाल व्दारा 29.04.2013 को दिए गए निर्देशों के बाद 31.12.2012 की स्थिति में रतलाम जिले के शहरी क्षेत्रों में शासकीय नजूल,स्थानीय निकाय,विकास प्राधिकरण की भूमि पर निवास करने वाले ऐसे आवासीय व्यक्तियों जिनके पास उस पते का राशन कार्ड बना हो,को आवासीय भूमि के पट्टे दिए जाने हेतु तत्कालीन कलेक्टर रतलाम राजीव दुबे व्दारा 02.05.2013 को आदेश जारी कर नगर पालिक निगम के सभी वार्डों का सर्वे करवाया गया था। तत्कालीन कलेक्टर रतलाम के उक्त आदेश के पश्चात तत्समय पदस्थ अपर तहसीलदार व्दारा नगर पालिका निगम रतलाम के वार्ड क्रमांक 26 से 49 के लिए एक सर्वेक्षण दल का गठन किया गया था जिसमें दल प्रमुख तहसीलदार नजूल संजय वाघमारे तथा सदस्यों के रुप में नगर पालिक निगम के राजस्व अधिकारी संदेश शर्मा, नगर पालिक निगम रतलाम के सहायक यंत्री श्याम सोनी, नगर पालिक निगम रतलाम के उपयंत्री अनवर कुरैशी, दुबेन्द्र गोयल राजस्व निरीक्षक, सुनील कपूर सहायक राजस्व निरीक्षक नगर पालिक निगम रतलाम, राजेन्द्र सिंह राठौर सहायक वर्ग 3 नगर पालिक निगम रतलाम, कमलेश राठौर पटवारी रतलाम, सुशील भिण्डवाल पटवारी रतलाम को नियुक्त किया गया था। जिला कलेक्टर राजीव दुबे के आदेश के पश्चात अपर तहसीलदार व्दारा जारी आदेश में सर्वेक्षण दल के उपरोक्त अधिकारी-कर्मचारियों को 01.05.2013 से 31.05.2013 तक उपरोक्त वार्डों में सर्वे का कार्य पूर्ण करने के निर्देश भी दिए गए थे। इस सर्वे दल में शामिल नगर पालिक निगम रतलाम के अधिकारियों-कर्मचारियों,विकास शाखा के अधिकारियों-कर्मचारियों, इंजीनियर्स, आयुक्त नगर पालिक निगम रतलाम को यह भलीभांति जानकारी थी कि अर्जुन नगर रतलाम में उनके व्दारा ही कई भूखण्डधारियों से बड़ी धनराशि लेकर उन्हें भूखण्ड आवंटित किए गए हैं जिनके विक्रय पत्र सम्पादित किए जाने शेष हैं या जिन्हें विक्रय पत्र सम्पादित कर दिया गया है उन्हें विक्रय कर दिए गए भूखण्डों का कब्जा दिया जाना शेष हैं, लेकिन उनके व्दारा कलेक्टर रतलाम को किसी भी प्रकार की कोई आपत्ति जानबूझकर नहीं की गई और अतिक्रमणकारियों से षडयंत्र कर उन्हें वहां काबिज किए जाने का रास्ता साफ कर दिया गया और सर्वे के पूर्व ही अर्जुन नगर में झुग्गी-झोपड़ियों का कब्जा करवा दिया गया।अपर तहसीलदार व्दारा लिखी गई आदेश पत्रिका दिनांक 14.06.2013 के अनुसार – अर्जुन नगर में स्थित झुग्गी झोपड़ियां तत्कालीन नगर सुधार न्यास व्दारा विकसित की गई कालोनी में आवंटित भूखण्डों पर बने हैं, से यह स्पष्ट हो चुका था कि वे भूखण्ड जो नगर सुधार न्यास व्दारा कई लोगों को आवंटित कर उनसे बड़ी धनराशि प्राप्त कर ली गई है, उन पर झुग्गी झोपड़ियां बनाई जा चुकी हैं। उक्त आदेश पत्रिका दिनांक 14.06.2013 को लिखने वाले अपर तहसीलदार व्दारा वास्तविक स्थिति जानते हुए भी यह प्रतिवेदन दिया गया कि उक्त झुग्गी-झोपड़ियों वालों को एक वर्ष के लिए अस्थायी पट्टे दिए जा सकते हैं। उपरोक्त समस्त स्थिति स्पष्ट होने के बाद भी कलेक्टर राजीव दुबे और तत्कालीन एसडीएम शहर व्दारा नगर पालिक निगम के उपरोक्त अधिकारियों-कर्मचारियों से षडयंत्र कर योजना क्रमांक 67 अर्जुन नगर रतलाम के कई भूखण्डों पर करीब 34 व्यक्तियों को एक वर्ष के लिए अस्थायी पट्टे अलग-अलग क्षेत्रफल के जारी कर दिए गए और उन्हें वहां काबिज करवा दिया गया। यह सभी कार्यवाहियां रतलाम शहर के निवासियों और भूखण्डधारियों (जिन्हें नगर सुधार न्यास व्दारा भूखण्डों का आवंटन कर दिया गया है या जिन्हें विक्रय पत्र सम्पादन किए जाने के बाद कब्जा दिया जाना शेष था) से छुपाकर की गई हैं।नगर सुधार न्यास की योजना क्रमांक 67 अर्जुन नगर में बड़ी धनराशि चुकाकर भूखण्ड लेने वाले शिकायतकर्ता व अन्य व्यक्तियों को आवंटित भूखण्डों पर पट्टा वितरण की जिस अन्तिम सूची को तैयार किया गया था उस सूची पर तत्कालीन जिला परियोजना अधिकारी शहरी विकास प्राधिकरण रतलाम, तत्कालीन सहायक संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश रतलाम, तत्कालीन आयुक्त नगर पालिक निगम रतलाम, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रतलाम, तत्कालीन कलेक्टर रतलाम के हस्ताक्षर किए गए और इसके पश्चात इस सूची के आधार पर एसडीएम शहर व्दारा योजना क्रमांक 67 अर्जुन नगर रतलाम के भूखण्डों पर पट्टे जारी किए गए। उपरोक्त सभी दस्तावेज और जानकारी प्राप्त होने के पश्चात शिकायतकर्ता व्दारा जिलाधीश रतलाम सहित नगर पालिक निगम रतलाम के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों से कई बार अलग-अलग समय पर मिला और उन्हें निवेदन किया कि उक्त मामले की जांच की जाए और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुध्द अपराध दर्ज करवाया जावे लेकिन ये सभी एक सुर में स्वयँ को और दोषियों को बचाने की जुगाड़ करते नजर आए क्योंकि आज दिनांक तक इनके व्दारा तथा इनके पूर्वधिकारियों-कर्मचारियों व्दारा ही अतिक्रमणकारियों से अवैध लाभ प्राप्त कर उन्हें संरक्षण कर उनका पालनपोषण किया जा रहा था। उपरोक्त सभी अधिकारियों-कर्मचारियों तथा इनके पूर्व में पदस्थ रहे अधिकारियों-कर्मचारियों व्दारा किए जा रहे अवैधानिक कृत्यों के पश्चात शिकायतकर्ता व्दारा अलग-अलग समय पर योजना क्रमांक 67 अर्जुन नगर से सम्बन्धित दस्तावेजों तथा मौके पर शासकीय धनराशि का दुरुपयोग कर बनाए गई सड़कों आदि से सम्बन्धित जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन देकर नगर पालिक निगम से मांगी गई लेकिन कोई जानकारी शिकायतकर्ता को जानबूझकर नहीं दी गई।शिकायतकर्ता व्दारा मौके पर कब्जाधारी व्यक्तियों-अतिक्रमणकारियों को बिजली कनेक्शन दिए जाने, बिजली के पोल लगाए जाने बाबत जानकारी म.प्र.प.क्षे.वि.वि.क. रतलाम से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन देकर मांगी गई जो शिकायतकर्ता को जानबूझकर नहीं दी गई। नगर सुधार न्यास की योजना क्रमांक 67 में धनराशि जमाकर भूखण्ड का आवंटन प्राप्त करने भूखण्डधारियों को नगर पालिक निगम रतलाम के आयुक्त सहित सभी सम्बन्धित अधिकारियों-कर्मचारियों व्दारा टालमटोल कर परेशान किया किया गया और मौके पर काबिज कई अतिक्रमणकारियों से अवैध लाभ प्राप्त कर उनका संरक्षण किया गया। दूसरी ओर जिला प्रशासन के सम्बन्धित अधिकारियों व्दारा भी सम्पूर्ण प्रकरण की जानकारी होने के पश्चात भी नगर पालिक निगम से षडयंत्र कर दोषियों को संरक्षण दिया गया, जिससे योजना क्रमांक 67 अर्जुन नगर रतलाम के वास्तविक भूखण्ड आवंटी और क्रेता परेशान होते रहे। जिला प्रशासन और नगर पालिक निगम के सभी सम्बन्धित अधिकारियों-कर्मचारियों का यह कानूनी दायित्व था कि वे योजना क्रमांक 67 के भूखण्डों की हिफाजत करें और नियमानुसार कार्यवाही कर उन भूखण्डों के वास्तविक आवंटियों,खरीदारों को विक्रय पत्र सम्पादित कर उनका कब्जा प्रदान कर कालोनी का विकास कार्य पूर्ण करें लेकिन जिला प्रशासन व नगर पालिक निगम के आयुक्त व अन्य सभी सम्बन्धित अधिकारियों-कर्मचारियों व्दारा तो उनके विधिक दायित्व का पालन किया गया और न ही उन अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुध्द कोई अपराध दर्ज करवाकर कोई कार्यवाही की गई जिनके व्दारा उक्त अपराध किया गया था। आयुक्त नगर पालिक निगम और जिला प्रशासन व्दारा दोषियों को बचाने और उनके आपराधिक कार्यों को छुपाने का अपराध इसलिए किया गया क्योंकि सभी सम्बन्धित मौके पर काबिज अतिक्रमणकारियों से अवैध लाभ प्राप्त करते रहें हैं और उन्हें अवैधानिक रुप से संरक्षण देते रहें हैं। उपरोक्त सभी सम्बन्धित प्रशासनिक और नगर पालिक निगम रतलाम के अधिकारियों-कर्मचारियों का यह विधिक दायित्व था कि यदि योजना क्रमांक 67 अर्जुन नगर में अन्य व्यक्तियों से धनराशि लेकर उन्हें आवंटित भूखण्डों पर किसी भी कारण से अस्थायी पट्टे दे भी दिए गए हों तो उन्हें नियत एक वर्ष की अवधि के पश्चात तत्काल वहां से हटाकर सम्बन्धित आवंटनधारियों या खरीदारों को उक्त भूखण्डों का कब्जा सौंप कर नियमानुसार विकास कार्य पूर्ण कर दिया जावे लेकिन इनके व्दारा जानबूझकर ऐसा नहीं किया गया।उपरोक्त सभी अधिकारियों-कर्मचारियों व्दारा शासकीय सेवक होने के आधार पर उपरोक्त सभी आपराधिक कृत्य नहीं किए गए हैं बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत योजनाबध्द तरीके से उक्त आपराधिक कृत्य किए गए हैं। वर्तमान में जिला प्रशासन व्दारा दल-बल के साथ जिस प्रकार अवैध कालोनियों, अवैध निर्माणों पर कार्यवाही की जा रही है उसी प्रकार शिकायत में उल्लेखित अवैधानिक कार्यों की जांच तत्काल की जाकर समस्त अर्जुन नगर नगर सुधार न्यास की भूमि पर से अवैध निर्माण तत्काल हटाया जाकर दोषियों के विरुध्द नियमानुसार कार्यवाही की जाना अतिआवश्यक है क्योंकि जिला प्रशासन व्दारा नियम विरुध्द रुप से वितरित पट्टों की आड़ में दिनप्रतिदिन अतिक्रमण किया जा रहा है और वहां वर्तमान में अवैध कालोनी का निर्माण किया जा चुका है। शिकायतकर्ता व्दारा मुख्यमंत्री सहित जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक से शिकायत और सलंग्न दस्तावेजों के आधार पर पूर्व व वर्तमान आयुक्त नगर पालिक निगम, कलेक्टर, एसडीएम शहर,अपर तहसीलदार,वार्ड पार्षद, विद्युत वितरण कम्पनी के सम्बन्धित अधिकारियों-कर्मचारियों,नगर पालिक निगम से सम्बन्धित अधिकारियों-कर्मचारियों,सांसद निधि का दुरुपयोग करने वाले तथाकथित राजनैतिक व्यक्तियों तथा उक्त मामले से सम्बन्धित अन्य सभी व्यक्तियों के विरुध्द अपराध दर्ज करने तथा शिकायत में उल्लेखित तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए योजना क्रमांक 67 अर्जुन नगर तथा वितरित किए गए पट्टों तथा शासकीय राशि का दुरुपयोग कर अतिक्रमणकारियों को सुविधाएँ देने से सम्बन्धित समस्त अभिलेख जप्त करने, जिला प्रशासन व्दारा जारी किए गए समस्त अस्थायी पट्टे तत्काल निरस्त किए जावें, उक्त पट्टे जारी करने वाली जिला प्रशासन के अधिकारियों पर नियमानुसार कार्यवाही किए जाने की निवेदन शिकायत में किया गया है।

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