खबर पक्की 11 अक्टूबर रतलाम, 7 अक्टूबर से नवरात्रि प्रारंभ हो चुकी है त्योहार शांति और हर्षोल्लास के साथ निपट जाए इसके लिए शांति समिति की मीटिंग भी हुई थी जिसमें शहर की खराब सड़कों के बाबत बात हुई थी l लेकिन जिला प्रशासन और निगम प्रशासन के जिम्मेदारों ने इतना बड़ा त्यौहार के मद्देनजर भी जनता की तकलीफों को नजरअंदाज किया और सड़कों का पैच वर्क 15 तारीख से करने का निर्णय लिया जब पूरी नवरात्रि खत्म हो जाएगी यही कारण है कि मां कालिका के मंदिर को आने जाने वाले बुरी तरह खराब रास्ते पर चलते हुए माता के भक्त तत्कालीन कलेक्टर तन्वी सुंद्रियाल और रतलाम प्रेस क्लब को याद कर रहे हैं सितंबर 2017 में भारी बारिश के कारण छतरी पुल टूट गया था लेकिन 10 दिनों तक जिला प्रशासन और नगर निगम ने सुध नहीं ली नवरात्रि प्रारंभ होने वाली थी और इनके अकर्मण्यता को देखते हुए रतलाम प्रेस क्लब के तत्कालीन अध्यक्ष सुरेंद्र जैन द्वारा इन को सद्बुद्धि देने के लिए रतलाम प्रेस क्लब से मां कालिका माता तक पैदल मार्च का जनता से आह्वान किया सुबह 6:00 बजे आह्वान की पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होती है 7:45 बजे कलेक्टर तन्वी सुंद्रियाल मैडम की गाड़ी अंबेडकर चौराहे पर आती है साथ में पूरा जिला प्रशासन और निगम प्रशासन होता है तत्कालीन प्रेस क्लब अध्यक्ष सुरेंद्र जैन को बुलवाया जाता है और पूछा जाता है क्या तकलीफ है जब कलेक्टर मैडम को माता के पैदल आने वाले भक्तों और नवरात्रि के बारे में तकलीफ बयां की जाती है तो तुरंत 24 घंटे में छत्रि पुल के डायवर्सन मार्ग को बना दिया जाता है l इसी प्रकार 2015 की नवरात्रि पर सफाई कर्मियों द्वारा एन नवरात्रि के मौके पर हड़ताल कर दी जाती है और शहर के प्रमुख चौराहों पर मरे हुए कुत्ते फेंक दिए जाते हैं इस पर रतलाम प्रेस क्लब नागरिकों से आह्वान कर कालिका माता मंदिर के प्रांगण में सफाई करने का आव्हान करता है फल स्वरुप 4 घंटे में ही सफाई करने द्वारा हड़ताल खत्म कर दी जाती है l इसी प्रकार उरी में पाकिस्तान के आतंकी हमले के बाद 18 सैनिक मारे जाने पर विरोध में रतलाम प्रेस क्लब द्वारा सर्वदलीय सर्वधर्म पैदल मार्च निकाला जाता है जिसमें सभी जाति धर्म और सभी राजनीतिक दलों के लोग भारी तादाद में शामिल होते हैं और 8 दिन बाद उरी हमले का जवाब भारत की सेना द्वारा ले लिया जाता l आज शहर की खस्ताहाल खराब सड़कों को देखकर माता के भक्तों ने इस पर लिखने के लिए आग्रह किया और रतलाम प्रेस क्लब की पुरानी बातें याद दिलाई तो प्रशासन के अकर्मण्यता पर मुझे लिखने के लिए विवश होना पड़ा हो सकता है इस लिखने का कुछ असर हो जाएl
