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अभिभाषकगण ने कार्य से विरत रहकर किया जबलपुर घटना का विरोध, मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने की मांग की

BySurendra Jain

Oct 7, 2021

खबर पक्की, 7 अक्टूबर, रतलाम। जबलपुर के जिला न्यायालय में गेट नम्बर एक से अधिवक्तागणों का प्रवेश वर्जित करने व विरोध करने पर न्यायालय परिसर में ही अधिवक्ताओं की गिरफ्तारी करने के विरोद में गुरुवार को जिला न्यायालय में अभिभाषक कार्य से विरत रहे। इससे न्यायालयीन कार्य प्रभावित रहा। घटना को लेकर अभिभाषकों में रोष है। सुनील पारिख ने बताया की अभिभाषक संघ ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम (एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट) लागू करने की मांग की है।
जिला अभिभाषक संघ का प्रतिनिधिमंडल दोपहर में कलेक्टर कार्यालय पहुंचा। वहां संघ के सचिव विकास पुरोहित ने ज्ञापन का वाचन किया। इसके बाद संघ अध्यक्ष अभय शर्मा, उपाध्यक्ष नीरज सक्सेना आदि ने मुख्यमंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर कृतिका भीमावत को ज्ञापन सौंपा, जिसमें अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया है कि जबलपुर जिला न्यायालय के गेट नम्बर एक से प्रवेस वर्जित करने के विरोध में वहां के अधिवक्तागण एकत्र होकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस ने न्यायालय परिसर में ही अधिवक्तागणों को गिरफ्तार कर लिया। इस प्रकार से गिरफ्तारी करने से अधिवक्ता समुदाय के सम्मान व गरीमा को ठेस पहुंचाई गई है। कई वर्षों से अधिवक्तागण अधिवक्ता पोर्टेक्शन एख्ट लागू करने की मांग कर रहे है। कई बार न्यायिक कार्य से विरत रहे हैं व शांतिपूर्ण आदोलन भी किया गया, लेकिन अभी तक एक्ट लागू नहीं किया गया। इस कारण अधिवक्ताओं के सात बार-बार अप्रिय घटनाएं हो रही है। जबलपुर में हुई घटना से स्पष्ट होता है कि अधविक्ता समुदाय जो देख का सबसे शिक्षित व संभ्रात समुदाय है, उसके साथ अनैतिक व्यवहार व घटनाएं कारित करने में वृद्ध हो रही है। अधिवक्ता सरंक्षण अधिनियम लागू कर दिया जाए, इससे इस प्रकार की घटनाएं पूर्णत: बंद हो जाएगी। इस अवसर पर अभिभाषख योगेश शर्मा, अजय चंद्रावत, शांतिलाल मालवीय, सुनील पारिख, प्रकाशराव पंवार, शादाब खान, अनुभव उपाध्याय, राजकुमार मित्तल, सुनील परमार, सुधीर परमार, ललित कटारिया, तेजकुमार चौधरी, देवेंद्र सरदाना, सौरभ सक्सेना, कपिल मजावदिया, प्रणय ओझा, राकेश गुप्ता, मनमोहन बटवाल आदि उपस्थित थे।

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