खबर पक्की: 13 जुलाई रतलाम, जिले के बड़े कॉलोनाइजर राजेंद्र पितलिया को जिला प्रशासन और नगर निगम ने तगड़ा झटका दे दिया। ज्ञातव्य हो कि नगर निगम के प्रशासक अभी कलेक्टर ही है बताया जाता है कि राजेंद्र पितलिया को लोकेंद्र भवन के लिए पूर्व में जारी निर्माण अनुमति क्रमांक 683/2 2020-21 को 9 जुलाई को नगर निगम द्वारा निरस्त कर दिया गया। निर्माण अनुमति निरस्त का कारण संपत्ति को विवादास्पद बताया गया है। नगर निगम सिटी इंजीनियर जायसवाल ने बताया कि क्योंकि शिकायत प्राप्त हुई थी की संपत्ति विवादास्पद है निर्माण अनुमति जारी करने पर आपत्ति ली गई थी इसलिए निरस्त कर दिया गया। पूर्व में 2006-7 में भी कलेक्टर दीप्ति गौड़ मुखर्जी के वक्त लोकेंद्र भवन सुर्खियों में रहा था और जिला प्रशासन ने उस पर अपना बोर्ड टांग दिया था। तब तेजतर्रार जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेंद्र मुदगल के समय में प्रशासन को मुंह की खानी पड़ी थी और उनके आदेश पर कब्जा वापस सौंपना पड़ा था। तब तत्कालीन एसडीएम को कोर्ट में माफी मांगना पड़ी थी। लोकेंद्र भवन के निर्माण अनुमति निरस्त होने के बाद जनसामान्य में ऐसी चर्चा है कि बहुत जल्द जिला प्रशासन इसको भी सरकारी घोषित कर देगा। सांवलिया रुंडी में 60 साल पुराने मामले में कलेक्टर द्वारा आदिवासी को 1 दिन में पावती बना कर देना नामांतरण करवाना और कब्जा दिलवा देने के बाद जहां आदिवासियों में कलेक्टर की छवि रॉबिन हुड जैसे बन गई है वही जनसामान्य की आशा और अपेक्षाएं भी बहुत बढ़ गई है। और स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा इस मामले में ट्वीट कर कलेक्टर की प्रशंसा के बाद जिला प्रशासन के हौसले बुलंद है और निश्चित तौर पर आने वाले दिनों में कई धमाके होगे। लोकेंद्र भवन वाले मामले में कलेक्टर के विचार जानने की कोशिश की थी पर उनका कोई जवाब नहीं आया वही कॉलोनाइजर राजेंद्र पितलिया का कहना था कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। जो भी फैसला आएगा मंजूर होगा।
