खबर पक्की : 9 मई रतलाम, मेरी आत्मा पर कोई बोझ नहीं है हमने अपने तई भरसक प्रयास किए यही कारण है कि इतनी ज्यादा तादाद में मरीजों के आने के बावजूद रतलाम में ऑक्सीजन के अभाव में किसी मरीज की जान नहीं गई। पिछले तीन- महीनों से लगातार सुबह जल्दी उठना और देर रात को दो तीन और कभी-कभी तो 4:00 तक बजे तक सोना रूटीन बन चुका था,मेरी शासकीय सेवा के सर्वाधिक तनाव वाले यह 3 महीने रहे कहूंगा तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। महामारी फैलने की गति और मरीजों की बढ़ती तादाद इतनी तेज थी की आपके सारे अनुमान सारे साधन संसाधन कम पड़ना स्वाभाविक है। फिर भी रतलाम की जनता और यहां के समाजसेवी संस्थाओं का सहयोग अविस्मरणीय है और मैं उन सब का धन्यवाद ज्ञापित करता हूं जो उन्होंने इस कठिन समय में अपना अमूल्य सहयोग किया और लोगों की जान बचाई। उक्त उद्गार निवर्तमान कलेक्टर गोपाल चंद्र डांड ने खबर पक्की के साथ चर्चा में व्यक्त किये उन्होंने कहा कि हमने टारगेटेड संख्या से ज्यादा टेस्ट किया ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीजों का इलाज हो सके इसीलिए मरीजों की तादाद ज्यादा होना स्वाभाविक है और हमने जो किया इसके परिणाम हफ्ते 10 दिन बाद मिलना शुरू हो जाएगा लेकिन उन्होंने कहा कि अभी भी स्थिति को निरंतर मॉनिटर करने की जरूरत है जरा सा ध्यान हटा नहीं की स्थिति काबू से बाहर होते देर नहीं लगेगी। उन्होंने कहा कि मेरा सपना था कि मैं रतलाम को भी इंदौर नहीं तो कम से कम उसके जैसा शहर बनाऊं पर शायद ईश्वर को यह मंजूर नहीं था मैं रतलाम की जनता जनप्रतिनिधियों समाजसेवीयो पत्रकारों का धन्यवाद अदा करते हुए आने वाले नये कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम और सभी को शुभकामनाएं देता हूं की आने वाला समय सभी के लिए शारीरिक आर्थिक और मानसिक रूप से अच्छा हो।
