खबर पक्की :9 अप्रैल रतलाम जब रतलाम मेडिकल कॉलेज में कोरोना का इलाज हो रहा है और सारे रेमेडी शिविर इंजेक्शन वहीं लगना है तो सीधे संस्थागत खरीदी कर मेडिकल कॉलेज को क्यों नहीं दे दिए जाते और यदि मेडिकल कॉलेज के पास पैसे नहीं है तो कम से कम मेडिकल कॉलेज अपने काउंटर पर जरूरतमंद मरीजों को निर्धारित कीमत पर ही उपलब्ध करवा सकता है और बाकी जो जरूरतमंद आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है उनको देने के लिए महावीर इंटरनेशनल रतलाम प्रतिबंध है निशुल्क वितरित करने हेतु तो इस निशुल्क वितरण सेवा में बाधाएं खड़ी कर प्राइवेट लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए मार्केट में बिक्री पर क्यों जोर दिया जा रहा है रतलाम के हर प्रबुद्ध व्यक्ति को इस प्रश्न पर विचार करना चाहिए क्या कलेक्टर रतलाम और जनप्रतिनिधि इस मामले पर तुरंत ध्यान देंगे क्योंकि कोविड-19 से पीड़ित गंभीर मरीज के लिए एक 1 मिनट कीमती है 1 मिनट में इंजेक्शन लगने पर उसकी जान बच सकती है और एक मिनट देरी होने पर वह मृत्यु के गाल में समा सकता है यह प्रश्न सिर्फ डॉक्टर और मरीज के समझने की चीज है कुर्सी पर बैठे अधिकारी इसे जितना जल्दी समझ ले ठीक होगा
