खबर पक्की: 27 फरवरी रतलाम, एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जोर शोर से पानी बचाने और जल सोत्रो को सुरक्षित रखने के लिए दिन-रात आव्हान कर रहे हैं वही रतलाम शहर के नए मास्टर प्लान में बड़बड़ तालाब जिसे सज्जन मिल तालाब भी कहा जाता है का पूरा ग्रीन बेल्ट गायब कर दिया गया है और उसे आवासीय घोषित कर दिया है। जबकि 4 वर्ष पूर्व इसी भाजपा सरकार में इसी तरह के प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया था। आश्चर्य तो यह है कि वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व इस पर चुप क्यों है। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद इस रोड की जमीनों की कीमत बढ़ने से भूमाफिया कॉलोनाइजर इस क्षेत्र को टकसाल समझने लगे हैं यही कारण है कि राजनीतिक नेतृत्व व प्रशासन इनके हाथों का खिलौना बन मुक दर्शक होकर इनकी सहायता कर रहा है उनके इसे कार्यशैली से जनता में यह संदेश जा रहा है कि केक कटता है तो सब में बंटता है। पटरी पा र जहां एक और बड़ी आबादी बस चुकी है वहां इस तरह तालाब की जमीन का ग्रीन बेल्ट का रूपांतरण अक्षम्य है। रतलाम के राजनेता जागरूक जनता और सामाजिक संगठनों प्रशासन को इस मामले में तुरंत उचित कदम उठाना चाहिए क्योंकि सन 2006 में जब रतलाम में 80 इंच बारिश हुई थी और जल प्लावन की स्थिति बनी थी वैसी बारिश अगर दोबारा होती है तो एक बड़ी आबादी खतरे में पड़ जाएगी वही एक महत्वपूर्ण जलसूत्र को इस तरह बर्बाद करने से रोका जाना चाहिए। रतलाम के हितों को ताक पर रखकर इस तरह पैसा कमाने की स्कीम बंद होना चाहिए।
