नईदिल्ली। देश से चुनावी खर्च का बोझ कम करने के लिए एक नई कवायद शुरू की गई है। सूत्रों की माने तो इस बात की प्रबल संभावना है कि अगले साल यानि 2018 में होने वाले चार राज्यों के विधानसभा चुनाव के साथ ही लोकसभा चुनाव भी करा लिए जाएंगे। एक राष्ट्रीय अंग्रेजी अखबार ने चुनाव आयोग के उच्चाधिकारियों के हवाले से इस तरह की खबर का प्रकाशन किया है।
इस अखबार की माने तो चार राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम और राजस्थान में वर्ष 2018 के अंतिम महीनों यानि नवंबर दिसंबर में चुनाव कराए जाने है, इसके कुछ महीनों बाद ही अप्रैल-मई 2019 में लोकसभा चुनाव आ जाएंगे। विधानसभा और लोकसभा के महज कुछ महीनों का अंतराल ही देश को आर्थिक रूप से काफी भार दे जाएगा। ऐसे में सरकार और चुनाव आयोग के स्तर पर दोनों ही चुनाव एक साथ कराने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित भाजपा के भी कई बड़े नेता विधानसभा और लोकसभा चुनाव देश में एक साथ कराए जाने की बात कह चुके है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मुद्दे पर अपनी राय जाहिर करते हुए कह चुके है कि लगातार होने वाले विधानसभा चुनावों से न सिर्फ सरकारों की कार्यप्रणाली पर असर पड़ता है बल्कि इससे देश पर भी आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। माना जा रहा है कि यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाने के मुद्दे पर सहमति बनती है तो तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिसा राज्यों के चुनाव भी 2018 अंत में ही करा लिए जाएंगे।
