• Thu. Jul 30th, 2026

सावधान ! कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा के घोटालेबाज निकरा परियोजना अधिकारियों से

BySurendra Jain

Feb 6, 2020

खबर पक्की: 6 फरवरी आंबा, अंबा की निकला परियोजना के संचालकों द्वारा केवीके के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने से घबराकर केवीके प्रबंधन ने आंबा से निकरा का कार्यालय नवाबगंज शिफ्ट करने का निर्णय ले लिया है कार्यालय शिफ्ट करने के निर्णय से प्रबंधन के भ्रष्टाचार की स्वीकारोक्ति स्वयं हो रही है एक तरफ केंद्र सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और किसानों के जीवन यापन में सुधार के लिए प्रयत्न कर रही है वहीं कृषकों के विकास के लिए बनाई गई संस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार चिंता का विषय है।
0 परियोजना की संचालन समिति में 3-3 सदस्य नवाबगंज व दौलतपुरा के भी हैं, उन्हें भी निकरा के भ्रष्टाचार की जानकारी है, और वे घपले रोकने तथा घपलेबाजों को सजा दिलाने में हमारे साथ हैं।
0 परियोजना में लिखित में कभी भी कोई जानकारी नहीं दी गई। अधिकारियों ने ही जुबानी निर्देश से नवाबगंज और दौलतपुरा के किसानों पर पहले कृषि उपकरण व अन्य योजनाओं का लाभ देने पर प्रतिबंध लगाया गया था। तथा उन्हीं के निर्देश पर पिछले डेढ़ वर्ष से वह प्रतिबंध हटा लिया गया है। आगे भी प्रतिबंध नहीं रहेगा।
0 हम भ्रष्टाचार के सबूत लिए बैठे हैं, तीन बार जांच कमेटियां आईं। सबूत किसी ने नहीं मांगे, सब लीपापोती करके चल दिए।
(1) आम्बा के बाबूलाल चौधरी को जो परियोजना में यन्त्र कर्मचारी था, को पिछले 20 माह का वेतन नहीं दिया गया है। उसने सूचना के अधिकार के अंतर्गत परियोजना के बजट, आय-खर्च आदि के बारे में 3 मई 19 और 19 दिसम्बर 19 को दो बार जानकारियां मांगी। जो नहीं दी गई हैं। बाबूलाल सरकारी नियमों के अनुसार जानकारियों के लिए तय शुल्क भी देने को तैयार है। यदि हिसाब में कोई गड़बड़ी नहीं है, तो वे जानकारी देने में डर कैसा ?
(2) वर्ष 2018-19 में निकरा समिति की जानकारी में परियोजना में केवल 60 हजार रु. के कार्य करवाए गए, लेकिन खर्च बताया गया 6 लाख 30 हजार रु. का। हमने खर्च का विवरण मांगा है, लेकिन वे देने को तैयार नहीं हैं। यदि सब कुछ साफ सुथरा है, तो जानकारी क्यों नहीं देते ?
(3) आम्बा के दो आदिवासी श्रीमती गीताबाई पूर्व सरपंच तथा विदेश पिता रतनलाल इन दो हितग्राहियों से 10 से 15 हजार रु. प्रत्येक से निजी खर्च करवा कर पिंजरे बनवा लिए। लेकिन उन्हें डेढ़ साल बाद मुर्गी के 50-50 बच्चे जो मात्र 8 दिन उम्र के थे दिए। वह भी बिना रोग रोधी टीके लगाए हुए। आते ही 8-10 दिन में वे सारे मर गए। इतने छोटे बच्चों की कीमत 25-30 रु. से ज्यादा नहीं होती है। लेकिन बिल 100 रु. प्रति बच्चे के हिसाब से बनाकर लगाए गए। बकरी पालन योजना में हुए भ्रष्टाचार का निकरा के कागजात में कहीं उल्लेख ही नहीं है।
(4) परियोजना के फंड से करीब 40-40 हजार रु. मूल्य के 2 कल्टीवेटर खरीदे गए थे। इनमें से समिति को केवल एक ही दिया गया। ये लोग हमें बिल दिखाने को तैयार नहीं हैं।
(5) निकरा परियोजना के एक अन्य आम्बा निवासी कर्मचारी के 40 से 50 हजार रु. के भ्रष्टाचार के सबूत समिति के पास हैं। लेकिन केवीके इसकी जांच कर राशि वसूल करने तथा उसे सजा दिलाने के स्थान पर केस को रफा-दफा करने में लगा है। हालांकि समिति के दबाव के चलते उसे तथा एक अन्य सहायक परियोजना अधिकारी को नौकरी से हटाना पड़ा है। लेकिन घपले फिर भी बंद नहीं हुए।
(6) परियोजना में फंड ना होने का झूठ बोलते हुए नए कृषि उपकरण खरीदने के लिए ग्राम समिति से 30 हजार रु. उधार मांगे। तथा समिति को पुराने तथा टूटे-फूटे यंत्र लाकर दे दिए। उधार ली गई राशि भी वापस नहीं लौटाई।
(7) समिति की कार्यवाही पुस्तिका से तीन बैठकों की कार्यवाही जिनमें शायद निकरा के भ्रष्टाचार के कुछ सबूत थे, परियोजना के निकाले गए कर्मचारी ने पन्ने फाड़कर नष्ट कर दिए। समिति द्वारा लिखित शिकायत करने पर भी केवीके ने उस पर कोई कार्यवाही नहीं की।
0 चूंकि आम्बा में इनके भ्रष्टाचार का भांडा फूट चुका है, इसलिए आंबा छोड़कर भागना इनकी मजबूरी हो गई है। नवाबगंज और दौलतपुरा दोनों गांवों के किसान बंधुओं से अनुरोध है, कि वे केवीके अधिकारियों की दाने दिखाकर भाईयों में फूट डालने की राजनीति को समझें। उनसे कड़े शब्दों में कहें – “आम्बा में निकरा परियोजना की जो करीब 2 लाख रु. की देनदारियां बाकी हैं, पहले उनका भुगतान करें। भ्रष्टाचार पर पूछे जा रहे प्रश्नों के जवाब दें। तथा वहां पूरा साफ-सुथरा हिसाब देने के बाद ही यहां आने की बात सोचें। परियोजना की वर्तमान समिति पर हमें केवीके से ज्यादा भरोसा है।”
आपकी शुभचिंतक – कार्यपालन समिति, निकरा परियोजना, आम्बा।
घोटाले की विस्तृत जानकारी के लिए संपर्क करें राजेंद्र सिंह राठौड़ आंबा 97540 90 525

error: Content is protected !!