रतलाम/कबीर का क्षैत्र जाति धर्म या देश को लेकर काम करना नहीं हम विश्व में सभी मानव जाति को लेकर कार्य करते हैं कबीर ने पूरे मानव जाति की बात की है कबीर ने कभी भी मानव को जाति धर्म के आधार पर नहीं देखा देश ही नहीं पूरी दुनिया को इस पर काम करना चाहिए। उपरोक्त बात पद्मश्री से सम्मानित कबीर भजन गायक प्रहलाद सिंह टिपानिया ने रतलाम में विशेष चर्चा में कही उन्होंने कहा कि कबीर ने मानव की बात की है मानव चाहे किसी भी धर्म का हो सभी का नजरिया अपना-अपना हो सकता है तरीका भी अलग हो सकता है लेकिन सबका लक्ष्य एक ही है। उन्होने कहा कि जब मानव एक दूसरे की आंख में आंख डालकर देखता है तो उसे सामने वाले में भी अपना ही स्वरूप दिखाई देता है। प्रत्येक मानव को कबीर को जानना चाहिए। संतों की वाणी गाने या सुनने की नहीं मन में उतारने की है यदि कबीर की वाणी बार-बार जनमानस के बीच जाएगी तो जरूर मानव के जीवन पर करारी चोट करेगी और जो शब्दों की चोट मानव जीवन पर लगती है वह उससे मानव अपने जीवन में उतारने का जरूर प्रयास करता है। इसका जीता जागता उदाहरण है कि कबीर भजन से आदिवासी व कंजर समाज के जीवन में कई बदलाव आया है। आदिवासी क्षेत्र में आदिवासियों ने कबीर भजन व सत्संग अपनाकर शराब व मांस का त्याग भी किया है वहीं कंजरो ने भी अपनी परंपरागत आदतों को छोड़कर सत्संग की ओर आ रहे हैं। मानव में कबीर की वाणी से बदलाव आ रहा है आज के मालवा क्षेत्र में भी कबीर की वाणी को मौखिक जिंदा रखने वाले बुजुर्ग लोग बहुत हैं कबीर जीवन का एक दर्शन है बुजुर्गों ने मौखिक रूप से इसे जिया है।जो किताबों में नहीं है उसे प्रैक्टिकल रूप से अपने जीवन में उतारा जा सकता है। कबीर ने जो भी बात अपनी वाणी में कही है वह अपने जीवन शैली में सार्थक सिद्ध हुई है। सत्संग माध्यम से समाज सेवा विगत 2001 से कबीर भजन गा रहा हूं। जब तक मानव समर्पित भाव से काम नहीं करेगा तब तक उसे ज्ञान की प्राप्ति नहीं होगी प्रदेश में भी कबीर संग्रहालय होना चाहिए।
