• Thu. Jul 30th, 2026

महिला कर्मचारियों के लिए चुनाव आयोग के विशेष निर्देश के बावजूद  4 विधानसभा में उल्लंघन सिर्फ रतलाम में पालन

BySurendra Jain

Nov 27, 2018
खबर पक्की: चुनाव आयोग के स्पष्ट निर्देश है की मतदान दल में शामिल सहायक महिला कर्मचारी का मतदान बूथ यदि मुख्यालय से 20 किलामीटर के दायरे में है तो वह चाहे तो मतदान सामग्री प्राप्त करने के पश्चात अपने मतदान बूथ पर प्रीसाइडिंग अधिकारी के सुपुर्द कर मतदान दिवस के दिन सुबह 6 बजे अपने मतदान बूथ पर रिपोर्टिंग कर सकती है। यह विशेष निर्देश चुनाव आयोग ने महिलाओं की सुरक्षा और उनकी परेशानियों को समझते हुवे जारी किये है। उक्त निर्देशो के पालन में पूरे मध्य प्रदेश में सभी मतदान सामग्री वितरण केंद्रों पर मतदान सामग्री वितरण के समय माइक पर अनाउंस कर महिला कर्मचारियों को यह बात बताई गई किंतु रतलाम जिले में चुनाव आयोग के महिला कर्मचारियों के हित में लिए गये उक्त निर्णय का पालन सिर्फ रतलाम शहर विधान सभा सीट पर हुवा और यहां तहसीदार सोनी ने सभी महिला कर्मचारियों को बताया की वे चाहे तो सामग्री प्राप्त कर पीठासीन अधिकारी के सुपुर्द कर सुबह 6 बजे अपने मतदान बूथ पर रिपोर्टिंग कर सकती है। किंतु जिले की आलोट, जावरा,सैलाना और रतलाम ग्रामीण विधान सभा में चुनाव आयोग के इन निर्देशों का पालन नही करने से मतदान दलों में शामिल महिला कर्मचारियों को चुनाव आयोग द्वारा उनके स्वास्थ्य सुरक्षा और सुविधा के लिए बनाये गये निर्देशो का फायदा नही मिल पायेगा और इस सर्दी के मौसम में उन्हें रात मतदान केंद्र पर ही गुजारना पड़ेगी।सैलाना और रतलाम ग्रामीण की रिटर्निग अधिकारियो से जब इस सम्बन्ध में चर्चा की गई तो उन्होंने कहा की हमने महिला कर्मियों की सुरक्षा हेतु पूरी व्यवस्था की है इस लिए वे मतदान केंद्र में रात रूकती है तो कोई परेशानी नही है। उपजिला निर्वाचन अधिकारी प्रवीण फुलपगारे ने कहा की हां चुनाव आयोग के इस तरह के निर्देश तो है पर ये कर्मचारियों को बताए गये है या नही इस बारे में मुझे पता नही है। वही जिला निर्वाचन अधिकारी का कहना है की ये नियम सिर्फ P2P3 महिला कर्मचारियों के लिये है और पीठासीन अधिकारी है तो उसको तो रात वही रुकना है। पर असल में जिले के 4 विधानसभा क्षेत्रो की महिला कर्मचारियों को चुनाव आयोग द्वारा उनके हित में बनाये गये इस नियम का लाभ नही मिल पाया है और कड़ाके की ठंड में उनको बगैर संसाधनों के रात अपने पुरुष सहकर्मियों के साथ ही गुजारने के लिये मजबूर होना पड़ेगा।चुनाव आयोग को यह पता लगाना चाहिए की महिला कर्मचारियों के हित में उसके द्वारा बनाये इन निर्देशों का पालन कितने जिलो में नही हुवा और इस के लिये कोन जिम्मेदार है। दो महीने से जिले में मतदान दलों की ट्रेंनिग चल रही है किंतु किसी भी स्तर पर महिला कर्मचारियों को इस बात की जानकारी नही दी गई। मतदान दलों में शामिल अनेक महिला कर्मचारियों ने बताया की उन्हें इस नियम की जानकारी नही है और ये तो आप बता रहे हो की चुनाव आयोग ने हमारी सुविधा के लिए यह नियम बनाया है अगर हमें पता होता तो हम सामग्री पीठासीन अधिकारी के सुपुर्द कर सुबह 6 बजे कार्य स्थल पर आ जाती रात की नींद पूरी हो जाती तो सुबह कार्य भी और ज्यादा ऊर्जा के साथ कर सकती।
error: Content is protected !!