नई दिल्ली। दुनिया में कहीं भी घटना के कारण इंटरनेट बंद करने के मामले बहुत कम देखे जाते हैं, लेकिन भारत विश्व के उन देशों में सबसे आगे हैं, जहां किसी हिंसा की घटना के दौरान तुरंत इंटरनेट सेवा बंद कर दी जाती है। भारत, इंटरनेट शटडाउन के मामले में दुनिया में पहले स्थान पर आ गया है। 2012 में पहली बार नौ घंटे रोकी गई थी इंटरनेट सर्विस, वहीं साल 2017 में 8,141 घंटे तक रोकी गई।
सरकारी प्राधिकारियों के अनुसार 2018 में 121 बार इंटरनेट शटडाउन हुए हैं। यह आंकड़े दिल्ली बेस्ड सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर इंटरनेट शटडाउन ट्रैकर ने जारी किए हैं। गुरुवार को फ्रीडम ऑन द नेट 2018 की रिपोर्ट को जारी किया गया, जिसमें भारत का स्कोर 43 है। पिछले साल यह स्कोर 41 था, यानी इस वर्ष भारत की रेटिंग में दो अंकों की गिरावट दर्ज की गई है।
यह डाटा दिखाता है कि कैसे सरकारी नियंत्रण की वजह से इंटरनेट की स्वतंत्रता पर असर पड़ा है। भारत गिरकर आंशिक मुक्त श्रेणी में आ गया है। बताते चलें कि स्कोर जितना ज्यादा होगा, इंटरनेट की आजादी उतनी कम होगी। जैसे कि 0 स्कोर का मतलब है पूरी स्वतंत्रता, वहीं 100 का मतलब है कि इंटरनेट पर कोई स्वतंत्रता नहीं है। भारत में सरकार दंगे, हेट क्राइम की घटनाओं, परीक्षा में होने वाली नकल को रोकने के लिए इंटरनेट सेवा को बंद कर देती है।
शटडाउन के उदारणों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है, तमिलनाडु में व्हाट्सएप पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक बच्चे का अपहरण किया जा रहा था। इसमें बच्चों का अपरहरण करने वालों को लेकर चेतावनी दी गई थी। यह वीडियो मूल रूप से पाकिस्तान से अपहरण के खिलाफ एक घोषणा थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त 2017 में उच्चतम न्यायालय द्वारा निजता को मौलिक अधिकार बनाने का आदेश दिया गया था। यह इंटरनेट स्वतंत्रता की एक जीत थी, लेकिन इसमें कई उल्लंघन हुए हैं।
अगर रिपोर्ट की प्रमुख बिंदुओं की बात करें तो शोधकर्ताओं ने बताया कि केंद्र सरकार हर महीने फोन टैपिंग के लिए 7,000 से 8,000 आदेश जारी करती है। साल 2012 से 2017 के बीच भारत में 16 हजार 315 घंटों के लिए इंटरनेट को बंद किया गया। वहीं, भारत में 12 हजार 615 घंटों के मोबाइल इंटरनेट शटडाउन की वजह से अर्थव्यवस्था को 16 हजार 590 करोड़ रुपए का और 3700 घंटे के फिक्स्ड लाइन इंटरनेट शटडाउन की वजह से 4,746 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
आए दिन कश्मीर में हो रही घटनाओं के बाद यहां इंटरनेट सबसे ज्यादा बार शटडाउन किया जाता है। यहां चल रहे सैन्य ऑपरेशन्स के कारण आम जनता के भड़कने के अंदेशे के लिहाज से कई मौकों पर इंटरनेट सेवा बंद करनी पड़ी है। साल 2012 से लेकर अब तक यहां 112 बार इंटरनेट बंद किया गया था। इसके बाद राजस्थान में 56 बार, उत्तरप्रदेश में 12, हरियाणा में 12, गुजरात में 11, बिहार में 10 बार इंटरनेट बंद किया गया था। इंटरनेट को सबसे कम महज एक बार के लिए तमिलनाडु, तेलंगाना, झारखंड, आसाम और चंडीगढ़ में बंद किया गया था।
विदेशों की यह है स्थिति
अगर विदेशों में इंटरनेट शटडाउन की बात करें, तो आइसलैंड, एस्टोनिया में इस साल महज छह बार इंटरनेट को बंद किया गया। वहीं, इंटरनेट आजादी के मामले में कनाडा को 15 स्कोर मिला है। सबसे कम इंटरनेट आजादी के मामले में 83 अंकों के साथ सीरिया, 85 अंकों के साथ ईरान और 88 अंकों के साथ चीन का नंबर आता है।
इंटरनेट शटडाउन के मामले में भारत सबसे आगे
