खबर पक्की, 19 सितंबर, रतलाम। मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय की निश्रा में चातुर्मास कर रही महासती चंद्रयशाजी मसा ने 45 उपवास की दीर्घ तपस्या पूर्ण कर ली है। प्रखर अश्विन गंग 36 उपवास का दीर्घ तप 20 सितंबर को पूर्ण करेंगे। उनका नगर भव्य चल समारोह निकालकर बहुमान किया जाएगा।
प्रवर्तकश्री की प्रेरणा से रतलाम चातुर्मास के दौरान लगातार तपस्याएं चल रही है। कई तपस्वी मासक्षमण के दीर्घ तप की और अग्रसर है। शनिवार को प्रवर्तकश्री ने श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में मधुबाला-दिलीप गंग परिवार प्रखर ने 36 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। मधुबाला गंग भी सिद्धी तप भी कठिन आराधना कर रही है। रविवार को चातुर्मास आयोजन समिति एवं श्री संघ के तत्वावधान में चल समारोह निकलेगा, तत्पश्चात धर्मसभा आयोजित होगी। इसके बाद गंग परिवार द्वारा स्वामी वात्सल्य का आयोजन किया जाएगा।
मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवचन देते हुए प्रवर्तकश्री ने पाप कर्म की निर्झरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पाप महसूस करना और स्वीकारना सरल होता है, लेकिन उन्हें बोलना कठिन होता है। पाप कर्म होने पर उन्हें पात्र व्यक्ति के सामने बोलकर पाप की आलोचना करना चाहिए। इससे पाप कर्मो की निर्झरा हो जाती है। प्रवर्तक श्री ने कहा कि कर्मों का हिसाब हर व्यक्ति का होता है। इसलिए पाप कर्म हो, तो उसकी निर्झरा करने में पीछे नहीं रहे। निर्झरा करने वाला विकास करता है और पाप साथ लेकर चलने वाला पीछे रहता है।
आरंभ में सेवाभावी श्री दर्शन मुनिजी मसा ने संबोधित किया। इस दौरान प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8 मंचासीन रहे। संचालन प्रकाश मूणत एवं रखब चत्तर ने किया। श्री धर्मदास जैन श्री संघ के सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे।
श्रमण संघीय प्रवर्तकश्री की निश्रा में महासती चंद्रयशाजी मसा की 45 उपवास की दीर्घ तपस्या पूर्ण
