खबर पक्की, 8 सितंबर, रतलाम। व्यापारी को कमजोर समझने की भूल न करे सरकार, अब सब्र का बांध टूट रहा है।” यह बात दी ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन, रतलाम के अध्यक्ष सुरेंद्र चत्तर, वरिष्ठ संचालक कैलाश ओरा एवं वरिष्ठ संचालक संजय जोशी ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य में कही।
उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया कि 6 सितंबर, रविवार को इंदौर में सकल अनाज दलहन तिलहन व्यापारी महासंघ के तत्वावधान में महासंघ के अध्यक्ष श्री गोपाल दास जी अग्रवाल की अध्यक्षता में प्रदेश के विभिन्न व्यापारी संगठनों के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में प्रदेशभर के व्यापारियों की मंडी संबंधी समस्याओं, मंडी शुल्क, भूखंड एवं गोदामों के मालिकाना हक, भंडारण सुविधाओं तथा व्यापारियों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में प्रदेश के विभिन्न व्यापारी संगठनों के पदाधिकारियों ने अपनी-अपनी समस्याएं एवं सुझाव रखे। व्यापारियों की समस्याओं और मांगों को लेकर उपस्थित सभी पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि इन विषयों को शासन के समक्ष मजबूती से रखा जाएगा तथा 17 सितंबर को भोपाल में प्रदेशभर के व्यापारी एकत्रित होकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
इसी सर्वसम्मत निर्णय के तहत 17 सितंबर को भोपाल में प्रदेशव्यापी व्यापारी सम्मेलन एवं शक्ति प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इसमें मंडी नीतियों, भूखंड एवं गोदामों के मालिकाना हक, मंडी शुल्क, भंडारण सुविधाओं सहित व्यापारियों की विभिन्न समस्याओं एवं मांगों को प्रमुखता से शासन के समक्ष रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि मंडी प्रांगणों में कृषि उपज के भंडारण के लिए भूखंड एवं गोदाम नीलामी अथवा टेंडर के माध्यम से दिए जाते हैं। व्यापारियों से कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार भारी-भरकम राशि वसूली जाती है, लेकिन लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद व्यापारी को भूखंड एवं गोदाम का स्पष्ट मालिकाना हक नहीं दिया जाता।
अनेक व्यापारियों ने 20 से 50 वर्ष पूर्व लाखों रुपये खर्च कर गोदाम बनाए अथवा खरीदे, लेकिन आज भी वे अपने ही गोदाम के अधिकार को लेकर असमंजस में हैं। यदि भूखंड अथवा गोदाम को हस्तांतरित या बेचा जाता है तो कलेक्टर गाइडलाइन के अतिरिक्त अलग से राशि वसूली जाने की व्यवस्था भी व्यापारियों के लिए परेशानी का कारण है। इस पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता और स्पष्ट नीति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त भंडारण सुविधा नहीं मिलने के कारण छोटे एवं मध्यम व्यापारी कृषि उपज खुले में रखने को मजबूर हैं। मंडी शुल्क सहित विभिन्न शुल्कों का भुगतान करने के बाद भी व्यापारियों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। बारिश, चोरी एवं अन्य कारणों से कृषि उपज को नुकसान होता है और उसका आर्थिक भार व्यापारी को उठाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि कृषि उपज देश की राष्ट्रीय संपदा है, जिसकी सुरक्षा के लिए मंडी प्रशासन को आधुनिक एवं पर्याप्त भंडारण व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए। सभी पात्र लाइसेंसी व्यापारियों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप भूखंड एवं गोदाम उपलब्ध कराना सरकार और कृषि विपणन बोर्ड की जिम्मेदारी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार उद्योगों को रियायती दरों पर भूमि एवं विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, तो मंडी व्यापारियों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है? व्यापारी सरकार के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देता है, इसके बावजूद मंडी व्यवस्था में व्यापारी को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश का व्यापारी अत्यंत सीमित मार्जिन में व्यापार करता है, जबकि मध्य प्रदेश में मंडी शुल्क का भार व्यापार को प्रभावित कर रहा है। महाराष्ट्र और गुजरात में मंडी शुल्क की दर लगभग 50 पैसे प्रति सैकड़ा होने से मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के व्यापारी वहां के व्यापारियों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं। परिणामस्वरूप प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों की कृषि उपज बड़ी मात्रा में महाराष्ट्र और गुजरात की ओर जा रही है, जिससे प्रदेश के व्यापार एवं राजस्व दोनों को नुकसान हो रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कृषि क्षेत्र में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। सरकार को पड़ोसी राज्यों की मंडी व्यवस्था का अध्ययन कर मध्य प्रदेश में भी सरल, पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धी मंडी नीति लागू करनी चाहिए।
व्यापारी नेताओं ने मांग की कि रतलाम नगर की मथुरी में लगभग 120 बीघा भूमि पर विकसित की जाने वाली मंडी को प्रदेश की आदर्श मंडी के रूप में विकसित किया जाए। सभी पात्र व्यापारियों को औद्योगिक क्षेत्रों की तर्ज पर रियायती एवं व्यावहारिक दरों पर भूखंड तथा गोदाम उपलब्ध कराए जाएं। पूरे मंडी प्रांगण को पेट्रोल पंप की तर्ज पर कवर्ड किया जाए, ताकि बारिश, धूप एवं अन्य मौसम की परिस्थितियों से कृषि उपज को होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि व्यापारी सरकार को करोड़ों रुपये का जीएसटी एवं मंडी शुल्क देता है। इसके बावजूद व्यापारी और उसके परिवार के लिए चिकित्सा बीमा तथा वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। सरकार को मंडी लाइसेंसी व्यापारियों एवं उनके परिवारों के लिए चिकित्सा बीमा और सामाजिक सुरक्षा की योजनाएं लागू करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
सुरेंद्र चत्तर, कैलाश ओरा एवं संजय जोशी ने कहा कि 6 सितंबर को इंदौर में हुई प्रदेश स्तरीय बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय के अनुरूप 17 सितंबर का भोपाल सम्मेलन प्रदेश के व्यापारियों की एकता और शक्ति का प्रदर्शन होगा। प्रदेशभर के व्यापारी एकजुट होकर अपनी जायज मांगों को सरकार के समक्ष रखेंगे।
उन्होंने कहा कि व्यापारी वर्षों से प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सरकार के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देता आया है। लगातार उपेक्षा से व्यापारी समाज में असंतोष बढ़ रहा है। सरकार व्यापारियों को कमजोर समझने की भूल न करे और समय रहते उनकी जायज मांगों का समाधान करे।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए मुफ्त की खैरात बांटने के बजाय सरकार को व्यापार, उद्योग, रोजगार और निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर ध्यान देना चाहिए। मजबूत व्यापारी और मजबूत उद्योग ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति दे सकते हैं।
