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प्रशासनिक लापरवाही : जीवित महिला को कागजों में मार डाला, अब न्याय के लिए कलेक्टर के द्वार पहुंची पीडि़ता

BySurendra Jain

May 12, 2026

खबर पक्की, 12 मई, रतलाम। जिले के पिपलोदा तहसील से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां सरकारी रिकॉर्ड की बड़ी लापरवाही ने एक जीवित महिला को मृत घोषित कर दिया। कागजों में मृत घोषित होने के कारण पीडि़ता को न केवल मानसिक प्रताडऩा झेलनी पड़ रही है, बल्कि उसे तमाम सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित कर दिया गया है। मामला अब जिला कलेक्टर की जनसुनवाई तक पहुंच गया है।
ग्राम खेड़ा कलालिया की निवासी रईसा बाई पति जगदीशनाथ ने कलेक्टर को सौंपे शिकायती पत्र में बताया कि वह वर्तमान में जीवित हैं और अपने निवास स्थान पर रह रही हैं। वह वार्ड नंबर 14 से पंच के पद पर भी नियुक्त हैं। बावजूद इसके, ग्राम पंचायत खेड़ा कलालिया के सरपंच और सचिव ने कथित तौर पर उन्हें मृत घोषित कर दिया।
फर्जी प्रमाण पत्र हुआ जारी
पीडि़ता के अनुसार, उनके पति गोपाल कुंवर (पूर्व पति का संदर्भ) के नाम पर उन्हें मृत बताते हुए एक फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया है। इस प्रमाण पत्र (संख्या ष्ठ-20202307699000077) में उनकी मृत्यु की तिथि 15 जनवरी 2023 दर्शाई गई है। महिला का आरोप है कि इस गलत जानकारी के आधार पर उनका नाम सरकारी रिकॉर्ड और योजनाओं से हटा दिया गया है।
पहचान पर संकट
रईसा बाई ने आवेदन में दर्द बयां करते हुए कहा कि कागजों में मृत होने के कारण उन्हें शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो गया है। एक जीवित व्यक्ति होने के बावजूद खुद को जिंदा साबित करने के लिए उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
दोषियों पर कार्रवाई की मांग
पीडि़ता ने जनसुनवाई के माध्यम से मांग की है कि उनके नाम पर जारी फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र को तत्काल निरस्त किया जाए। उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में पुन: जीवित घोषित कर योजनाओं का लाभ बहाल किया जाए। लापरवाही बरतने वाले या साजिश रचने वाले सरपंच और सचिव के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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