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जावरा नगर पालिका अध्यक्ष अनम यूसुफ कड़पा के वित्तीय अधिकारों पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

BySurendra Jain

Mar 20, 2026

खबर पक्की, 20 मार्च, जावरा। नगर पालिका, परिषद में अध्यक्ष निर्वाचन को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं करने की प्रशासनिक चूक अब भारी पड़ती दिख रही है।
इसके चलते मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने अब जावरा नगर पालिका अध्यक्ष अनम यूसुफ कड़पा के वित्तीय अधिकारों पर अंतरिम रोक लगा दी है। प्रदेश के अन्य नगरीय निकायों में भी इसी तरह के मामलों में पहले ही ऐसी कार्रवाई हो चुकी है, जिससे अब व्यापक असर देखने को मिल रहा है।
जावरा की पार्षद रुकमणि धाकड़ की ओर से एडवोकेट अमित राज ने उच्च न्यायालय में याचिका (डब्ल्यूपी-9863-2026) दायर की थी। इसमें मध्य प्रदेश शासन सहित अन्य पक्षकार बनाए गए।
शुक्रवार को सुनवाई करते हुए न्यायाधीश प्रणय वर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका स्वीकार कर ली। राज्य शासन की ओर से अधिवक्ता दृष्टि रावल ने पक्ष रखा। न्यायालय ने अंतरिम व्यवस्था के तहत स्पष्ट किया कि जावरा नगर पालिका अध्यक्ष अनम यूसुफ कड़पा अगली सुनवाई तक अपने वित्तीय अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकेंगी।
यह रोक तब तक लागू रहेगी, जब तक उन्हें विधिवत निर्वाचित अध्यक्ष घोषित करने वाला गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं हो जाता। मामले को पूर्व में लंबित समान याचिका (10957/2024) के साथ टैग कर सुनवाई की जाएगी।
पहले भी मिल चुकी है अंतरिम राहत
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इसी तरह के मामले (10957/2024) में पहले ही न्यायालय अंतरिम राहत दे चुका है। उस याचिका में भी संबंधित निकायों के अध्यक्षों के वित्तीय अधिकारों पर रोक लगाई गई थी। इसी आधार पर समानता बनाए रखते हुए जावरा मामले में भी यही अंतरिम आदेश पारित किया गया। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रोसेस फीस जमा होने के सात कार्यदिवस के भीतर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए जाएं, अन्यथा याचिका स्वत: निरस्त मानी जाएगी।
पूरे प्रदेश में असर, कई निकाय प्रभावित
मध्य प्रदेश में कुल 99 नगर पालिकाएं और 298 नगर परिषद हैं। वर्ष 2022 में हुए निकाय चुनावों के बाद यह स्थिति बनी।
तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में ओबीसी आरक्षण (27 प्रतिशत) का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। कोर्ट के निर्देश पर राज्य निर्वाचन आयोग ने जल्दबाजी में चुनाव तो करा दिए।
नगर निगमों में महापौर सीधे जनता से चुने गए।
इधर नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष पार्षदों में से चुने गए थे, लेकिन कई मामलों में विधिवत गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं हो पाया।
इसी खामी के चलते अब कानूनी चुनौतियां बढ़ रही हैं और अध्यक्षों के अधिकारों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पहले भी लग चुकी है रोक
जावरा से पहले प्रदेश के श्योपुर और पानसेमल नगर परिषदों के अध्यक्षों के वित्तीय अधिकारों पर भी अदालत रोक लगा चुकी है। जावरा नप अध्यक्ष अनम युसुफ कड़पा ने बताया कि प्रदेश स्तर पर इस तरह की स्थिति बन रही है। कोर्ट के आदेश का अवलोकन कर आगे अपील करेंगे।

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