खबर पक्की : 13 नवंबर रतलाम, पहलवानों और प्रभावशाली लोगों के सामने हाथ बांधकर खड़े रहने वाले व जनता की छोटी सी गलती पर राई का पहाड़ बनाने वाले सरकारी अधिकारी व कर्मचारी अपनी खुद की गलतियों व चोरियों पर किस तरह पर्दा डालते हैं यह नगर निगम रतलाम की कार्य प्रणाली से स्पष्ट होता है। यह पूरी घटना 8 फरवरी 2025 की है रतलाम में यूं तो सैकड़ो पत्रकार व कई अखबारों का प्रकाशन होता है पर फिर भी इतनी बड़ी चोरी की खबर 10 महीने तक चूक जाना सवाल तो खड़े करता है उसमें खबर पक्की स्वयं भी शामिल है। खबर पक्की को यह खबर आज ही पता चली है खबर यह है कि रतलाम नगर निगम के जल प्रदाय विभाग के एक बाबू जिनका नाम जितेंद्र उपाध्याय है और बताया जाता है कि वे वर्तमान भाजपा जिला उपाध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय जी के सगे भाई है वह विद्युत लोड प्रॉपर नहीं आने की शिकायत करते है। इसकी शिकायत पर विद्युत मंडल द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने पर वह सीएम हेल्पलाइन में शिकायत करते है। जब सीएम हेल्पलाइन में शिकायत सेकंड स्टेज पर पहुंच जाती है तो वहां कार्यरत सहायक इंजीनियर अरविंद वर्मा जांच के लिए पहुंचते हैं और बाबू जितेंद्र उपाध्याय से रिक्वेस्ट करते हैं कि सीएम हेल्पलाइन से शिकायत वापस ले ले उनकी समस्या का निराकरण कर दिया जाएगा। उनके रिक्वेस्ट पर बाबू जितेंद्र उपाध्याय द्वारा अपनी शिकायत वापस ले ली जाती है। अब विद्युत मंडल के सहायक इंजीनियर अरविंद वर्मा द्वारा लोड कम आने की शिकायत पर जब जांच प्रारंभ की जाती है तो यह पाया जाता है कि अग्निशमन विभाग के लिए मात्र एक मीटर नगर निगम द्वारा लिया गया है जिस पर 4 किलो वाट का लोड है। लेकिन वहां चलने वाले संपत्ति कर विभाग जलकर विभाग और अन्य विभागों का करीब 40 किलोवाट का लोड अलग से है लेकिन यह सब डायरेक्ट विद्युत मंडल की लाइन से जोड़कर चलाया जा रहा था। इस पर जांबाज और निडर विद्युत मंडल अधिकारी अरविंद कुमार वर्मा द्वारा बिजली चोरी का पंचनामा बनाकर नगर निगम के इंजीनियर कुशवाहा को अवगत कराया जाता है और 27 लाख रुपए की डिमांड की जाती है और कनेक्शन विच्छेद कर दिया जाता है। करीब 4,5 दिन कनेक्शन विच्छेद रहने के बाद चूंकि इतनी बड़ी चोरी की खबर फैलने से नगर निगम की प्रतिष्ठा धूमिल होती और किसी ना किसी कर्मचारी या बाबू को बलि का बकरा बनना पड़ता इसलिए उससे बचने का एक नया रास्ता निकाला गया। नगर निगम द्वारा चार नए कनेक्शन 10 किलो वाट के लिए आवेदन किया गया। इन आवेदनों के फल स्वरुप विद्युत मंडल द्वारा अपने उक्त 27 लाख रुपए का बकाया नए कनेक्शन के बिल में समायोजित कर दिया गया। और चार नए मीटर लगा दिए गए । बताया जाता है कि विद्युत मंडल के नियमों के अनुसार चाहे कितने भी वर्षों से चोरी हो रही हो लेकिन बकाया और जुर्माना सिर्फ 1 वर्ष का ही लगाया जा सकता है इस कारण बरसों से नगर निगम द्वारा की जा रही उक्त विद्युत चोरी के बदले विद्युत मंडल को मात्र 27 लख रुपए ही मिले। अन्यथा नगर निगम को एक करोड़ से भी ज्यादा की राशि भरना पड़ती। पर हैरत इंगेज बात यह है कि उक्त चोरी के लिए नगर निगम में किसी को जिम्मेदार या जवाबदार नहीं ठहराया गया और पूरा मामला बड़ी सफाई से गायब हो गया क्या जिम्मेदार इस पूरे मामले को गंभीरता से लेकर किसी की जवाबदारी फिक्स करेंगे। पूरे मामले की जानकारी लेने के लिए विद्युत मंडल इंजीनियर अरविंद वर्मा से उनके फोन नंबर 8319762580 पर संपर्क कर जानकारी लेने की कोशिश की गई तो उन्होंने कहा कि पुराना मामला है मुझे ध्यान नहीं देखकर बताता हूं लेकिन नगर निगम के आंतरिक सूत्रों से मिली यह जानकारी एकदम सही और सटीक होने से खबर पक्की जनहित में देर से ही सही पर इस खबर को जारी कर रहा है।

