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किसानों ने किया प्रदर्शन, फसलें पूरी नष्ट हुई, सर्वे की जरूरत नहीं, बगैर सर्वे दें मुआवजा, नहीं तो प्रदेश भर में किया जाएगा आंदोलन

BySurendra Jain

Sep 12, 2025

खबर पक्की, 12 सितंबर, रतलाम। अतिवृष्टि तथा पीला मोजैक बीमारी लगने से जिले के अधिकांश किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी है। खेतों में फसल गल गई है और पीली पड़ गई है। फसलें खराब होने से किसान चिंतित और परेशान है। मुआवजा नहीं मिलने से किसानों में आक्रोश हैं। किसानों का कहना है कि अधिक बारिश वो पीला मोजैक ने सोयाबीन की पूरी फसल बर्बाद कर दी है। सरकार मुआवजा नहीं दे रही है, सर्वे के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। फसलें खराब होने से परेशान किसानों ने कृषि मंडी से शुक्रवार दोपहर रैली निकालकर प्रदर्शन किया। रैली कलेक्टर कार्यालय पहुंची तथा धरना देकर प्रदर्शन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम आर्ची हरित को ज्ञापन सौंपकर उचित मुआवजा देने की मांग की। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय करणी सेना परिवार के प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर ने जिले के अधिकांश क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल लगभग नष्ट हो चुकी है, इसलिए सर्वे की जरूरत नहीं है। बगैर सर्वे कराए किसानों को 11 हजार रुपए बीघा के मान से शीघ्र मुआवजा दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अभी किसान सरकार के साथ है, यदि शीघ्र उचित मुआवजा नहीं दिया गया तो प्रदेशभर में किसान आंदोलन किया जाएगा।
बड़ी संख्या में जिले भर के किसान शुक्रवार दोपहर महू रोड स्थित कृषि उपज मंडी में एकत्र हुए तथा वहां से विशाल रैली निकाली। रैली में शामिल किसान नारेबाजी करते हुए हाथों में खराब फसलें तथा नारे लिखी तख्तियां लिए चल रहे थे। तख्तियों पर अन्नदाता रोया तो देश भूखा सोया, वादे नहीं मुआवजा चाहिए, किसान रो रहा है, सरकार सो रही है आदि नारे लिखे हुए थे। रैली प्रताप नगर ओवरब्रिज होकर कलेक्टर कार्यालय पहुंची, जहां कलेक्टर कार्यालय के मैन गेट के समक्ष किसान धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करते हुए किसानों को शीघ्र मुआवजा देने, लंबित बीमा दावों का निराकरण करने, बगैर सर्वे के मुआवजा राशि निश्चित कर किसानों के खातों में राशि जमा करने तथा अन्य समस्याओं का निराकरण करने की मांग़ करने लगे।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय करणी सेना परिवार के प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर ने कहा कि जिले में अतिवृष्टि से अधिकांश किसानों की पूरी फसलें नष्ट हो गई है, पटवारी द्वारा सर्वे किया जा रहा है, लेकिन वे कहते हैं कि ऊपर से आदेश है कि 70 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान नहीं लिखना है, जबकि अधिकांश किसानों की पूरी फसल नष्ट हो गई हैं। पटवारी चार बाय चार क्षेत्र के हिस्से का सर्वे कर रहे हैं। जबकि दो, तीन या चार बीघा जमीन में नष्ट हुई फसलें किसान दिखाते हैं, तो उसे नहीं लिखा जा रहा है। यह कहां का न्याय है? जब फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं तो सर्वे की जरूरत नहीं है खेतों में न तो फसल दिखाई दे रही रही है और न ही उत्पादन की कोई उम्मीद बची है। किसने की मेहनत पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है हमारी शान से मांग है कि अब सर्वे की कोई जरूरत नहीं है सर्वे में समय व्यर्थ न करते हुए किसानों को राहत देने के लिए तुरंत एक निश्चित राशि तय कर सीधे उनके हाथों में जमा की जाए। सोयाबीन फसल और प्रति बीघा करीब 12500 रुपए लागत आती है। बीमा कंपनियां बार-बार पॉलिसी नंबर मांग कर किसानों को परेशान करती है, बैंक और बीमा कार्यालय में समय बर्बाद होता है, किसान साथी परेशान होते हैं लेकिन समाधान नहीं हो रहा है। नुकसान का मुआवजा सरकार दे, बीमा अलग से लिया जाएगा, क्योंकि बीमा कंपनी ने पालिसी के लिए किसानों से बीमा राशि ली है। कंपनी ने किसानों को पालिसी नहीं दी है, सर्वे के दौरान पालिसी नंबर मांगा जा रहा है। किसान बैंक जाकर परेशान हो रहे हैं। बीमा कंपनी किसानों को बगैर जानकारी दिए बीमा कर देती है तथा किसानों के खातों से राशि काट ली जाती है। यह भी नहीं बताया जाता कि कौन कौन सी बीमारी कवर होगी, कंपनी को निर्देशित किया जाए कि किसानों को जानकारी देकर बीमा किया जाए। गर्मी व बारिश के मौसम में बिजली का किसान उपयोग नहीं करते हैं, बिजली कंपनी साल भर का बिल लेती है, हमारी मांग हे कि छह माह का ही बिल लिया जाए। पीला मोजैक सहित फसलों में होने वाली समस्त बीमारियों को बीमा में शामिल किया जाए।

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