खबर पक्की, 4 सितंबर, रतलाम। गुरुवार सुबह से आफत की बारिश जारी है। रिहायशी इलाकों में घरों में पानी घुस गया। रेलवे स्टेशन पर पटरी डूब गई। हनुमान ताल का पानी मंदिर परिसर में आ गया। ग्रामीण क्षेत्रों में तूफान से कई मकान ध्वस्त हो गए। गांवों में पानी भर गया। नदी-नाले उफान पर आ गए। रतलाम में कुछ मकान भी गिरे हैं, लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई।
रतलाम जिले में सुबह से हो रही बारिश रुक-रुक कर जारी है। बारिश से एक बार फिर जिले के नदी-नाले उफान पर आ गए हैं। गांवों का संपर्क टूट गया है। गांव डूब गए। जिले में 24 घंटे में गुरुवार दोपहर तक करीब साढ़े तीन इंच पानी गिर चुका है।
शहर के जवाहर नगर जनता कॉलोनी में नाले व सीवरेज ओवरफ्लो होने के कारण पानी लोगों के घर में घुस आया। पीएंडटी कॉलोनी, ई-एक्स जवाहर नगर कॉलोनी में घरों में पानी घुसने से रहवासियों का सामना करना पड़ा। किचन से लेकर हर एक कमरे में पानी नजर आया है। सोफा सेट को उठाकर पलंग पर लोगों को रखना पड़ा। घरों में से डेढ़ से दो फीट पानी था।
जनता कॉलोनी के रहवासियों ने बताया कि घर के पीछे नाला है। कई बार महापौर, कलेक्टर की जनसुनवाई व पार्षद को समस्या बता चुके हैं। लेकिन नाले पर अतिक्रमण के चलते जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। 30 सालों से परेशान है। लेकिन कोई सुनने व देखने वाला नहीं है।
रतलाम रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 की पटरी डूब गई। पटरी पर 1 से डेढ़ फीट पानी था। रेलवे के कर्मचारी पानी निकासी की व्यवस्था में लगे रहे। हालांकि कोई ट्रेनें प्रभावित नहीं हुई हैं। शहर हनुमान ताल व झाली तालाब लबालब हो गए। पानी ऊपर तक आ गया। हनुमान ताल के वेस्ट वियर से झरना बह निकला। मंदिर परिसर में चारों तरफ तालाब का पानी आ गया। लोगों इसे देखने भी पहुंचे।
रतलाम शहर में अलग-अलग क्षेत्रों में जर्जर हालात में दो मंजिला मकान भी गिरा है। घर में रखा सामान दब गया। घटना के समय घर में लोग मौजूद नहीं थे। इस कारण जनहानि होने से बच गई।
जिले के गांव घटवास में सुबह 8 से 9 बजे के बीच चक्रवात तूफान आया। 10 से 15 मिनट तक रहे तूफान ने गांव के बाहर बने मकानों को नुकसान पहुंचा दिया। पतरों के शेड बना रखे थे, जिनमें मवेश बांध रखे थे। तूफान की गति इतनी तेज थी कि हवा के साथ पानी की बौछारे उड़ती हुई दिखीं। यहां तक रोड पर खड़ी ट्रैक्टर ट्रॉली भी हवा से रोड की दूसरी तरफ तीरछी खड़ी हो गईं। कई घरों के पतरे के शेड धराशायी हो गए। 4 दिन पहले एक मकान की छत डली थी, वह भी गिर गई।
सुबह से हो रही तेज बारिश से एक बार फिर पलसोड़ा गांव पूरी तरह से पानी में डूब गया। पाने के कारण रतलाम आने का रास्ता बंद हो गया। घरों में भी पानी घुस गया। रहवासी अपने घरों के सामान को सुरक्षित करते रहे। सेजावता समेत अन्य गांवों में निचली जगहों पर पानी भरने की समस्या आई है।
रेलवे पटरी डूबी, घरों में पानी घुसा, धोलावाड़ डेम के 5 गेट खुले, गांवों का संपर्क टूटा
